24.10.26
मुज़ारे मुसम्मन अख़रब
मफ़ऊल फ़ाएलातुन मफ़ऊल फ़ाएलातुन
221-2122- //-221-2122
क्यों दूर हो गए तुम , हमको सजा दिला के
लानत मिली है हमको , रिश्ता सही निभा के
रखता हूँ पास अपने , मैं तारे आसमाँ …
ContinueAdded by Sushil on October 24, 2026 at 7:36pm — No Comments
हज़ज मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊल मुफ़ाईलु मुफ़ाईलु फ़ऊलुन
221 1221 1221 122
चाहत के इशारे कभी हमको नहीं आते
ये चाँद -सितारे कभी हमको नहीं आते
बोलो तो कभी ला दूँ मैं रातों में तबाही
ये दिन के उजाले कभी हमको नहीं आते
आवाज कहाँ देते …
ContinueAdded by Sushil on October 24, 2026 at 7:35pm — No Comments
24.10.26
कामिल मुसम्मन सालिम
मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन मुतुफ़ाइलुन
11212 11212 11212 11212
मैं किसे तो याद करूँ कहो किसे भूलना पड़े है मुझे
ये मिरे नसीब की खामियाँ तुझे बोलना पड़े है मुझे
है निगाह में मिरे शहर की बनी सब बड़ी ये इमारतें
तिरी ही गली…
ContinueAdded by Sushil on October 24, 2026 at 7:33pm — No Comments
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