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Lata R.Ojha's Blog – December 2010 Archive (14)

बस उड़ो..





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Added by Lata R.Ojha on December 30, 2010 at 4:00pm — No Comments

चलते गए ..



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Added by Lata R.Ojha on December 29, 2010 at 2:30am — 5 Comments

कैसे ???????

मेरी…

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Added by Lata R.Ojha on December 29, 2010 at 2:00am — 3 Comments

मुखौटा सच का ..?

होंठ…
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Added by Lata R.Ojha on December 27, 2010 at 1:00am — 6 Comments

मैने सॅंटा को देखा है ..

मानो…

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Added by Lata R.Ojha on December 26, 2010 at 1:30am — 4 Comments

सुबह फिर आ गयी जागो ..

सुबह फिर…

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Added by Lata R.Ojha on December 26, 2010 at 1:00am — 4 Comments

चल मेरे मन चलें वहाँ..



चल मेरे मन चलें वहाँ..  … Continue

Added by Lata R.Ojha on December 23, 2010 at 4:30pm — 6 Comments

ये..इश्क ही तो है..

चमकती चाँदनी के काजल सी रात..





सर्द हवा और तारों का साथ.. …



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Added by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 2:00pm — 9 Comments

जो ढूंढ सको तो..

 …

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Added by Lata R.Ojha on December 22, 2010 at 1:30pm — 8 Comments

तुम जो साथ हो ...

 

कहा किसी ने 'बहुत ख्वाब सजाती हो तुम.
ज़िंदगी को भी सजाना सीखो.
नुस्खे जितने बताती हो ज़िंदगी जीने के,…
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Added by Lata R.Ojha on December 21, 2010 at 11:30pm — 5 Comments

क्यों आज भी.....???

मैं भी कुछ लफ्ज़ तेरे बारे कह दूँ,

शायद तब दो घड़ी सुकून आए..…
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Added by Lata R.Ojha on December 20, 2010 at 12:30am — 2 Comments

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता........

एक दीप कहीं यूँ भी जलाया होता,


किसी नन्हे से दिल--दिमाग़ को रोशिनी…
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Added by Lata R.Ojha on December 11, 2010 at 2:00am — 2 Comments

स्वप्निल सपने..



कुछ सशब्द,कुछ नि:शब्द सपने,



कुछ व्यक्त ,कुछ अव्यक्त सपने..



कुछ मौन कुछ कोलाहल पूर्ण..



कुछ सुंदर ,कुछ कुरूप सपने..





कुछ मधुर,कुछ कड़वे सपने..



कुछ तृप्त,कुछ अतृप्त सपने..



कुछ सजीव कुछ प्रस्तर खंड..



कुछ माने ,कुछ रूठे सपने..





कुछ शहनाई,कुछ बलि वेदी..



कुछ दुल्हन कुछ अरथी सपने..



कुछ ग्यान पूर्ण,कुछ अग्यानि..



क्च मानव कुछ… Continue

Added by Lata R.Ojha on December 6, 2010 at 12:30pm — 2 Comments

ले चल अपने देस पिया जी ..





ले चल अपने देस पिया जी , ये घर अब ना भाए..



जी चाहे,तेरी सुगंध ऐसे मुझ में बस जाए..



जो भी देखे मुझको ,मुझमें तेरी छाया पाए..





रोम रोम मेरा हर पल बस तेरी महिमा गाए..



मेरे होठों पे जब आएँ शब्द तेरे ही आएँ..





इस भौतिक जीवन में तो अब ना ये मनवा रम पाए..



दुनियादारी सोचने बैठूं, तुझमें सुध खो जाए..





ले चल अपने देस पिया जी ,ये घर अब ना भाए..



हर… Continue

Added by Lata R.Ojha on December 6, 2010 at 12:00pm — 3 Comments

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