For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s Blog – November 2015 Archive (7)

धीरे-धीरे.........(बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)

अरकान - 122 122 122 122

 

किया जिसने दिल में ही घर धीरे-धीरे|

उसी ने रुलाया मगर धीरे –धीरे|

 

उमर  मेरी  गुजरी है यादों में जिनकी ,

हुई आज उनको खबर धीरे –धीरे |

 

जहाँ तक पहुचने की ख्वाहिश है मेरी,

यकीनन मैं पहुंचूंगा पर धीरे –धीरे|

 

बचपन में सरका जवानी में दौड़ा,

बुढापा गया अब ठहर धीरे-धीरे|

 

न शिकवा किसी से न है अब शिकायत,

भरा घाव मेरा मगर धीरे –धीरे|

 

मौलिक व…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 26, 2015 at 8:00pm — 4 Comments

दिन सुनहरा हो गया- बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान -   2122   2122   2122   212

 

आप आये और मेरा दिन सुनहरा हो गया|

आपको देखा तो मेरा फूल चेहरा हो गया|

  

कुछ समय पहले तलक तो थी हरी यें वादियाँ ,

आपके जाते ही तो हर  सिम्त सहरा हो गया|

क़त्ल का ए सिलसिला क्यों और आगे बढ़ गया,

जब से मेरे गाँव में कुछ सख्त पहरा हो गया |

 

लाख चीखो और चिल्लाओ सुनेगा कौन अब,

हाय पत्थर दिल ज़माना आज बहरा हो गया|

 

जख्म तो बस जख्म था जो भर भी सकता था मगर…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 20, 2015 at 10:00pm — 1 Comment

गीत - कितना तुझको याद किया.( बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

भूल गई मैं सारे जग को, फिर भी तेरा नाम लिया|

यादों में तेरी मुरली वाले, जीवन यूँ ही गुजार दिया,

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

 

देख के तेरी भोली सूरत हम भी धोखा खा ही गए,

मोहन तेरी मीठी-मीठी बातों में हम आ ही गए,

हार गए जीवन में सब फिर भी तेरा नाम लिया

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

 

करती हूँ कोशिश मैं मोहन याद हमेशा तुम आओ,

रह नही सकती…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 19, 2015 at 8:30pm — 2 Comments

नया कोई सपना सजाकर तो देखो| -बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

अरकान -    122      122      122    122  

नया कोई सपना सजाकर तो देखो|

परायों को अपना बनाकर तो देखो

 

लगेगी ए दुनिया तुम्हें खूबसूरत,

ज़रा दिल से नफ़रत भुलाकर तो देखो|

 

सफलता मिलेगी तुम्हें भी यकीनन,

कदम अपने तुम भी बढाकर तो देखो|

 

बहू-बेटियाँ क्यों न पर्दा करेगी,

हया उनको तुम भी सिखाकर तो देखो|

 

करोगे जहां को भी सूरज –सा रोशन,

तुम अपने को पहले तपाकर तो देखो|

 

बनेंगे…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 18, 2015 at 6:30pm — 9 Comments

मेरा पैगाम बाक़ी है|- बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

अरकान- 1222     1222     1222     1222

                    

 

सुनो सब गौर से वीरों मेरा पैगाम बाक़ी है|

न हारो हौसला अपना अभी तो लाम बाकी है|

 

मैं आकर मैकदे में अब बता कैसे रहूँ प्यासा,

पिला दे जह्र ही साक़ी अभी इक जाम बाक़ी है|

 

जमीं से तोड़कर रिश्ता बहुत आगे निकल आया,

मगर हालत कहते हैं अभी अंजाम बाकी है|

 

गए पकड़े वो सारे जो बहुत मासूम थे यारो,

सही कातिल का लेकिन इक सियासी नाम बाक़ी…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 17, 2015 at 12:00am — 4 Comments

बाकी सब कुछ अच्छा है|---बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान -   2 2   2 2    2 2   2 2     2 2   2 2   2 2   2    

तेरे बिन घर वन लगता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

तुझ बिन बेटे जी डरता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

 

माँ तेरी बीमार पड़ी है गुमसुम बहना भी रहती,

भैया का भी हाल बुरा है  बाकी सब कुछ अच्छा है|            

 

दादी तेरी बुढिया हैं  पर चूल्हा-चौका हैं  करती,                                      

कोई न उनका दुख हरता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

 

दादा जी पूछा करते…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 13, 2015 at 6:00pm — 8 Comments

न जाने क्यों भला फिर आज उनकी याद आयी है|

अरकान- 1222     1222       1222        1222 

न जाने क्यों भला फिर आज उनकी याद आयी है|

न मिलने की कसम जिनसे हमेशा मैंने खाई है|

मुरव्वत से हैं बेगाने हया तक बेच खाई है,

छूटे गर पिंड ऐसों से इसी में ही भलाई है|

तुम्हारी याद हावी है मेरे दिल पर उसी दिन से,

हुई खुशियाँ मेरी रुखसत दुखों से ही सगाई है|

समझकर देवता पत्थर को घर में ला बिठाया है,

इमारत दिल की यूँ अफसोस क्यों मैंने सजाई है|

जो मारा पीठ पर…

Continue

Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 9, 2015 at 8:00pm — 1 Comment

Monthly Archives

2022

2021

2019

2018

2017

2016

2015

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
21 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
22 hours ago
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service