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Jagdishtapish's Blog – August 2010 Archive (10)

उसने जो नाम ले के इक बार क्या पुकार लिया

उन्हें खबर नहीं के दर्द कब उभरता है --

किसकी यादों की रहगुजर से कब गुजरता है --

जख्म भरने की कोशिशों में उम्र बीत गई --

एक भरता है तो फिर दूसरा उभरता है --|





इक अजनबी चुपके से मन के द्वार आ गया --

पागल हुआ मन और उनपे प्यार आ गया

उसने जो नाम ले के इक बार क्या पुकार लिया

हमको लगा के मिलन का त्यौहार आ गया |





जो शौक से पाले जाते हैं वो दर्द नहीं कहलाते हैं --

जो दर्द हबीब से मिलते हैं वो दर्द ही पाले जाते हैं

जब टूट जाये उम्मीद… Continue

Added by jagdishtapish on August 29, 2010 at 8:12pm — 2 Comments

कुछ तो हूँ कुछ नहीं हूँ मैं

कुछ तो हूँ कुछ नहीं हूँ मैं
चंद लम्हों कि रुत नहीं हूँ मैं


मुझको सजदा करो ना पूजो तुम
संगमरमर का बुत नहीं हूँ मैं |


मेरे नीचे है अँधेरे का वजूद
शाम से पहले कुछ नहीं हूँ मैं |


यूँ ना तेवर बदल के देख मुझे
जिंदगी तेरा हक नहीं हूँ मैं |


बेखुदी में तपिश ये आलम है
वो खुदा है तो खुद नहीं हूँ मैं |

मेरे काव्य संग्रह ---कनक ---से

Added by jagdishtapish on August 28, 2010 at 10:17am — 3 Comments

रह कर भी साथ तेरे तुझ से अलग रहे हैं

रह कर भी साथ तेरे तुझ से अलग रहे हैं

कुछ वो समझ रहे थे कुछ हम समझ रहे हैं |





एक वक़्त था गुलों से कतरा के हम भी गुजरे

एक वक़्त है काँटों से हम खुद उलझ रहे हैं |





चाहत की धूप में जो कल सर के बल खड़े थे

मखमल की दूब पर भी अब पांव जल रहे हैं |





उठता हुआ जनाजा देखा वफ़ा का जिस दम

दुश्मन तो रोये लेकिन कुछ दोस्त हंस रहे हैं |





मेरा नाम दीवारों पे लिख लिख के मिटाते हैं

बच्चों की तरह बूढे ये चाल चल रहे हैं… Continue

Added by jagdishtapish on August 26, 2010 at 9:35am — 5 Comments

अपने दामन में छुपा लूँगा तुम आओ

अपने दामन में छुपा लूँगा तुम चले आओ
चराग दिल के जला लूँगा तुम चले आओ


तुम गया वक्त नहीं लौट के जो आ ना सके
फिर कलेजे से लगा लूँगा तुम चले आओ

में सनमसाज हूँ मर मर के तराशूंगा तुम्हें
काबायें दिल में लगा लूँगा तुम चले आओ


वफ़ा के नगमे लिखूंगा मै किताबे दिल पर
उम्र के साज पे गा लूँगा तुम चले आओ


सुकूने जिंदगी है ख़त का हर एक लफ्ज़ तपिश
पुर्जे-पुर्जे को उठा लूँगा तुम चले आओ
मेरे काव्य संग्रह ---कनक से ----

Added by jagdishtapish on August 23, 2010 at 12:00pm — 5 Comments

हाँ --कहा--- प्यार का इजहार किया था तुमसे

हाँ --कहा--- प्यार का इजहार किया था तुमसे --

हाँ ---कहो --- तुमने भी प्यार किया था हमसे



कसम खुदा की ईमान भी दे देते हम '

कसम खुदा की ये जान भी दे देते हम



उम्र भर अपनी पलकों पे बिठाये रखते '

सारी दुनियां की निगाहों से छुपाये रखते|



मगर अफ़सोस हमारा इरादा टूट गया'

उम्र भर साथ निभाने का वादा टूट गया



अय मेरे दोस्त नया घर तुझे मुबारक हो

नई दुनिया नया शहर तुझे मुबारक हो |



हमारा क्या है दिल पे एक जख्म और सही'

प्यार की… Continue

Added by jagdishtapish on August 19, 2010 at 10:33pm — 7 Comments

अय तिरंगे शान तेरी कम ना होने देंगे हम

तू हमारा दिल जिगर है तू हमारी जान है

तू भरत है तू ही भारत तू ही हिन्दुस्तान है

अय तिरंगे शान तेरी कम ना होने देंगे हम

तू हमारी आत्मा है तू हमारी जान है |



तेरी खुशबू से महकती देश की माटी हवा

हर लहर गंगा की तेरे गीत गाती है सदा

तू हिमालय के शिखर पर कर रहा अठखेलियां

तेरी छांव में थिरकती प्यार की सौ बोलियां

तू हमारा धर्म है मजहब है तू ईमान है |



जागरण है रंग केसरिया तेरे अध्यात्म का

चक्र सीने पर है तेरे स्फुरित विश्वास का

भारती की…
Continue

Added by jagdishtapish on August 13, 2010 at 9:47am — 4 Comments

मुक्तक

बिजलियाँ दिल पे गिराते जाइये --
आप तो बस मुस्कराते जाइये --
हर किसी से दिल नहीं मिलता मगर --
हाथ तो सबसे मिलाते जाइये |

तेरे नाम से ही मुझको दुनियां ने पुकारा है --
मेरी ज़िन्दगी का आखिर तू ही तो सहारा है --
परदा जो हटा दो तो दीदार मयस्सर हों --
हम गैर सही लेकिन परदा तो तुम्हारा है |

पहले तो मुझे होश में आने की दवा दो --
फिर आपकी मर्ज़ी है जो चाहे सजा दो --
जब टूट ही गया दिल जी के भी क्या करें --
जीने की दुआ दो या मरने की दुआ दो |

Added by jagdishtapish on August 11, 2010 at 9:22am — 1 Comment

ऐसे भी ज़माने में लोगो

ऐसे भी ज़माने में लोगो



ऐसे भी ज़माने में लोगो गमनाक फ़साने होते हैं

दुनिया से तो लाजिम है लेकिन खुद से भी छुपाने होते हैं



कुछ और नए देना है अगर दीजेगा मगर हंसते हंसते

नासूर बना करते हैं जो वो जख्म पुराने होते हैं



उठता है कोई जब दुनिया से कांधे पे उठाया जाता है

महफ़िल से उठाने के पहले इल्जाम लगाने होते हैं



पूछो न शबे फुरकत में क्यों ये दामन भीगा रहता है

दिल रोता है अन्दर अन्दर हँसना तो बहाने होते हैं



सौ बार तपिश मैखाने की… Continue

Added by jagdishtapish on August 10, 2010 at 10:56pm — 1 Comment

बेच दूंगा मैं खुद को खरीदेंगे आप

बेच दूंगा मैं खुद को खरीदेंगे आप

सोच के आज आया हूँ बाज़ार में --

दोस्तों मेरी कीमत जियादह नहीं

मैं भी बिक जाउंगा आपके प्यार में |



पहले हर बोल के मोल को तौलिये

'बाद में जो मुनासिब लगे बोलिए ---

बोल से ही तो जाहिर ये होता है के

'कितनी तहजीब होगी खरीदार में



इतनी जुर्रत कहाँ के लगा लूँ गले

ये भी हसरत नहीं के गले.से लगूं ---

जो मजा पा के सौ बार मिलता नहीं

वो मजा खो के पाया है एक बार में |



बिक रही है जमीं बिक रहा… Continue

Added by jagdishtapish on August 9, 2010 at 7:42pm — 3 Comments

लडखडाते हुए तुमने जिसे देखा होगा

लडखडाते हुए तुमने जिसे देखा होगा
वो किसी शाख से टूटा हुआ पत्ता होगा


अजनबी शहर में सब कुछ ख़ुशी से हार चले
कल इसी बात पे घर घर मेरा चर्चा होगा

गम नहीं अपनी तबाही का मुझे दोस्त मगर
उम्र भर वो भी मेरे प्यार को तरसा होगा

दामने जीस्त फिर भीगा हुआ सा आज लगे
फिर कोई सब्र का बादल कहीं बरसा होगा

कब्र में आ के सो गया हूँ इसलिए अय तपिश
उनकी गलियों में मरूँगा तो तमाशा होगा
मेरे काव्य संग्रह ---कनक--से -

Added by jagdishtapish on August 7, 2010 at 8:41pm — 7 Comments

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