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अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's Blog – August 2022 Archive (2)

नग़्मा-ए-जश्न-ए-आज़ादी

221 - 2121 - 1221 - 212

ख़ुशियों का मौक़ा आया है ख़ुशियाँ मनाइये

आज़ादी का ये दिन है ज़रा मुस्कुराइये 

क़ुर्बानियाँ शहीदों की भूलेंगे हम नहीं 

दिल से कभी हमारे मिटेंगे ये ग़म नहीं

माना वो दर्द हमसे भुलाया न जाएगा 

ये जश्न भी ख़ुशी का मिटाया न जाएगा 

मिलकर सब एक साथ तिरंगा उठाइये 

जय हिंद की सदा से फ़ज़ा को गुँजाइये 

ख़ुशियों का मौक़ा आया है ख़ुशियाँ मनाइये

आज़ादी का ये दिन है ज़रा…

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Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 15, 2022 at 12:05pm — 4 Comments

ग़ज़ल (जुनून-ए-इश्क़ जिसे हो कहाँ ठहरता है)

1212 - 1122 - 1212 - 22 

जुनून-ए-इश्क़ जिसे हो कहाँ ठहरता है

हवादिसात के सहरा से भी गुज़रता है 

हक़ीक़तों की ज़मीं पर जो आ ठहरता है 

तसव्वुरात के दरिया में कब उतरता है 

बुझा सका है कभी इश्क़ की लगी भी कोई 

भड़कती आग का दरिया है ख़ुद उतरता है 

मियाँ शराब नहीं सिर्फ़ शय बुरी, तन्हा  

बुतों का हुस्न भी ईमाँ ख़राब करता है 

तमाम दर्द मेरे दिल के मिट ही जाते…

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Added by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 5, 2022 at 7:33pm — 2 Comments

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