For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naval Kishor Soni's Blog – August 2012 Archive (15)

क्यों चुप रहता है सूरज ?

यूँ तो सूरज का गर्वित होना वाजिब है
अपनी शान पर ,
क्योंकि अपनी रश्मियाँ फैलाता है ,
वो ज़मीं पर .
करता है रोशनी .
पर यह ज़मीं भी तो सहती है ,
धूप, सर्दी और बरसात सब.
क्यों चुप रहता है सूरज तब .
क्या दिखती नही उसे इस
ज़मीं की सहनशीलता ???

Added by Naval Kishor Soni on August 29, 2012 at 12:10pm — No Comments

अब भी कहोगें तुम मुझे सती ????

झुंझुनू यात्रा के दौरान

घुमाया गया मुझे

तथाकथित "रानी सती" के मंदिर में.

मंदिर में प्रवेश करते ही दरवाजे पर लिखा था ....

"हम सती प्रथा का विरोध करते है"

पर अंदर जाकर जिस तरह श्रदालुओं का दिखा रेला ,

और बाहर भी लगा था भक्तों का मेला ,

मेरे मन में सवाल उठा कि-------

जब दुनिया से गया होगा इस महिला का पति,

तो क्या अपनी इच्छा से हुई होगी यह सती ?

वहां तो कोई जवाब नहीं मिला पर रात को सपने में आई वो महिला .

उसे देखकर पहले तो मैं डरा फिर मेरा…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 28, 2012 at 4:30pm — 2 Comments

शिक्षा में क्रांति-----------

बातें करते है "वो" शिक्षा में क्रांति की

कहते है अब जरुरी हो गई है

शिक्षा में क्रांति ?

मैंने पूछा किस तरह की क्रांति चाहते है आप ?

जवाब था आमूलचूल परिवर्तन

पूरी शिक्षा व्यवस्था को बदलना होगा

मैने कहा आप भी शिक्षक है आप कुछ करियें ना ?

वो बोले मेरे अकेले के करने से क्या होगा ?

क्रांति के लिए जरुरत होती है जनता के सैलाब की .

विचार और जज्बे के फैलाव की ----------------------?

मैनें कहा बहुत कुछ हो सकता है.

आप अपनी कक्षा से कर सकते है…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 28, 2012 at 3:00pm — No Comments

भाषा बिना -----

जो तुम बोलते हो क्या सिर्फ वही है भाषा ?

मैं जब सोचती हूँ तुम्हें

और खोती हूँ ,

तुम्हारे ख्यालों में ,

सपने सजाती हूँ नयनों में ,

और मुझे बहुत दूर जहाँ

के पार ले जाते है मेरे सपने

वहां जहाँ कोई नही होता मेरे पास

मैं नहीं खोलती अपना मुंह

फिर भी मैं बतयाती हूँ

फूलों से,तितलियों से, बहारों से

और तुमसे .

मेरे अहसास में होते हो तुम ,

बिन बोलें करती…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 24, 2012 at 5:30pm — 8 Comments

शायद ये कुछ बताएं तुम्हें-------

यह जो तुम्हारे आस पास

नदियाँ है ना.

इनको कभी देखना मेरी

नज़र से .

यह तुम्हें बिना थके

बिना…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 24, 2012 at 5:30pm — No Comments

बस करो अब भागना ---------

 क्यों कर जाते है परिस्थितियों से पलायन हम ,

ये परिस्थितियां ही तो सिखाती है हमें जीना

पलायन में कहाँ होती है ,

स्थितियों को बदलने की इच्छा,

फिर क्यों नहीं हम परिस्थितियों का सामना करते रूककर ,

आखिर कहाँ जा सकते है भागकर .

जहाँ जायेंगें वहां  की स्थितियां ,

फिर खड़ी होंगी बन कर परिस्थितियां

इनका कोई अंत नही ,

तो बस करो अब भागना

और करो दृढ़ निश्चय

परिस्थितियों से संघर्ष का…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 24, 2012 at 11:00am — 7 Comments

दो कवितायेँ

1. सब मिल जुल कर जियो



भाई देखो यह देश और दुनियां तो सबकी हैं .

किसी एक के बाप का हक नही है इस पर .

फिर क्यों झगड़ा करते हैं हम बेवजह ?

जब तक जियो सब मिल जुल कर जियो यार .

तेरा, मेरा, इसका,उसका छोडो यह तकरार .

सब मिल कर रहो आपस में करो प्यार .

क्या रखा हैं हेगडी में एक दिन मर जाओगे यार .



2. सरोकार



तुम्हारे हमारे सरोकार क्या हैं

तुम क्या समझते हो परोपकार क्या है ?

किसी को देना अठन्नी-रुपया

यह परोपकार…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 12:30pm — 5 Comments

सरोकार -----

तुम्हारे हमारे सरोकार क्या हैं

   तुम क्या समझते हो

   परोपकार क्या है ?

किसी को देना अठन्नी-रुपया

यह परोपकार नहीं  है भैया ,

  उसे इस काबिल बनाने में करो मदद

   कि वो खुद कमाले …

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 12:19pm — 6 Comments

तीन कह-मुकरियां -----[नवल का नव प्रयोग ]


१.
वह जब आती मन को भाती,
सबके जीवन को हर्षाती ,
कभी कभी देती है तरसा,
क्यों सखा सजनी, ना 'बरसा'.

२.
वो जब आती मैं सो जाता ,
गहरे सपनों में खो जाता ,
उस संग हो जाता 'रिंद'
क्यों सखा सजनी, ना नींद
 ३.
सुरूर उसका जब छाता है .
रोम रोम सा खिल जाता है.
उसके आगे सब खराब .
क्यों सखा सजनी,ना शराब.

Added by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 11:00am — 6 Comments

जीने का तरीका --------

गेंदा ,चंपा, ,चमेली ,
जूही के यह जो फूल हैं
ये सिर्फ महकते ही नहीं ,
ये हमें सिखाते है
जीवन जीना
और अपनी महक बिखेरना
और उस गुलाब को देखो
वो अपने ही काटों से छिदा है
फिर भी मुस्कुराता है हरदम
क्या इन फूलों से सीख़ नहीं
सकते हम जीवन जीने का तरीका ?

Added by Naval Kishor Soni on August 23, 2012 at 10:30am — 3 Comments

पढ़ती हैं विज्ञान को--------!!!

चाँद पर रख दिए हमने कदम
विकास कर रहे हैं हर दम
पहुंचे हैं आज यहाँ हम सदियों में.
पर आज भी पूजा जाता है चाँद
मेरे गांव/शहर की गलियों में ,
और चौथ का व्रत रखती हैं महिलाएं
खुश करने को अपने सुहाग को,
बी. एस.सी करती है पढ़ती हैं विज्ञान को,
पर आज भी दूध पिलाती है नागपंचमी पर नाग को.
चाहे जितना कर लो तुम विकास वो अब भी मिथकों पर है मरती .
उनके लिए आज भी शेष नाग पर टिकी है धरती !!!!!

Added by Naval Kishor Soni on August 21, 2012 at 3:00pm — 13 Comments

कह-मुकरियां

१. मंहगाई

दिल को देती है तन्हाई,
कभी ना होती उसकी भरपाई !
तुम क्या जानों पीर पराई ,
क्यों सखा सजनी, ना सखा मंहगाई !!

२. नेता

वो जब भी आये बलईयाँ लेता ,
सबके हाल पर चुटकी लेता !
रोज नये आश्वासन देता,
क्यों सखी साजन, ना सखी नेता !!

Added by Naval Kishor Soni on August 21, 2012 at 1:30pm — 12 Comments

सब तरफ हो शांति !

सब तरफ हो शांति जले दीप न्याय का !
विरोध करें मिल कर हम सब अन्याय का !
भूखे तो सब जगे मगर भूखा सोयें न कोई !
खुशहाली हो चहूँ ओर खून के आंसू रोयें न कोई !
हर हाथ को काम मिलें बेरोजगार रहे न कोई !
सब को काम का पूरा दाम मिले बेगार सहे न कोई !
सब कोई हमें पुकारे सदैव भारतीय के नाम से
हिन्दू ,सिख,इसाई , मुसलमान कहें न कोई .

Added by Naval Kishor Soni on August 20, 2012 at 11:30am — No Comments

देश जवाब मांगता है !

जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है ,

गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है !

पूछता है क्यों सत्य का गला रुंध है ?

क्यों न्याय पर छा रही अन्याय की धुंध है ?

क्यों लुटती नारी आज यहाँ ,क्यों पौरुष खाक छानता है ?

जब भी कोई संविधान की सीमा लांघता है ,

गाँधी-नेहरु का देश जवाब मांगता है !

क्यों कन्या भ्रूण हत्याएं होती है ?

क्यों अबलायें रोती है ?

क्यों पग पग पर मौत की घाटी है ?

क्यों सत्य अहिंसा पर मिलती लाठी है ?

लोकतंत्र का प्रहरी क्यों दर दर…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 17, 2012 at 1:30pm — 6 Comments

यह कैसी आज़ादी है ???

यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ?

भ्रष्टाचार और मंहगाई ने सबकी नींद उड़ा दी है ?

कुछ लोग हुए आबाद ,भूखों मरती आबादी है !

यह कैसी आज़ादी है , यह कैसी आज़ादी है ?

संविधान के बाहर जाकर औकात दिखादी है !

संविधान के मूल्यों की बलि आज चढ़ा दी है…

Continue

Added by Naval Kishor Soni on August 17, 2012 at 1:00pm — 1 Comment

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service