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Akhand Gahmari's Blog – May 2014 Archive (6)

गजल दिल जलाते है

1222   1222   1222  1222

कहाँ से अजनबी दिल के हमारे पास आते है/

हमारे दिल में बस कर वो हमारा दिल चुराते है



हमारी‍ जिन्‍दगी भी तो अमानत होे गई जिनकी

वही अब जिन्‍दगी में आग जाने क्‍यों लगाते है





जहर खाना नहीं जीवन बड़ा अनमोल सुन लो तुम



न खाये हम जहर तो क्‍या करें वो दिल जलाते है





हमारे सपनो को अपना कभी वो समझते ले‍किन

न जाने क्‍यों…

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Added by Akhand Gahmari on May 31, 2014 at 10:00pm — 7 Comments

बस जा तू

गीत

मेरे ख्‍वाबो में बस जा तू तेरे हम साथ चल देगे

तेरा सूना पड़ा जीवन प्‍यार मे हम तो बदल देगे



तेरे तो साथ चलने को मेरा यह दिल तड़पता है

वि़ऱह की अाग जो जलती रही उसमें ये सुलगता है

कभी तुम पास आ देखो तुम्‍हे़ हम प्‍यारा कल देगे

मेरे ख्‍वा़बो में बस जा तू तेरे हम साथ चल देगे



खुली आँखो से देखे थे कभी हम सपनो जो तेरे

सनम तू आके बन जाना हकीकत सपनो के मेरे

तुझे छुअेगे  कभी काँटे हम काँटो को मसल देगे

मेरे ख्‍वाबो में बस जा तू तेरे हम…

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Added by Akhand Gahmari on May 28, 2014 at 10:36am — 12 Comments

जिन्‍दगी में हमने जिनको वफा सिखाया था

2122      1222      1212   211

जिन्दगी भर जिसे हमने इश्क सिखाया था

बेवफा हम नहीं हमने उसे बताया था

दिल दुखाया नहीं हमने कभी न माने वो

आग में जल पड़े दुश्मन गले लगाया था

बात भी प्‍यार से वाे अब कभी नही करते

चाँदनी रात में जिसने कभी बुलाया था

हम मनाते रहे कसमे जिसे सभी देकर

मौत की नीद भी हमको वही सुलाया था

जल रहा…

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Added by Akhand Gahmari on May 27, 2014 at 9:30pm — 6 Comments

प्रीति की रीत

2122 1221 2212

चोट खाते रहे मुस्‍कुराते रहे

प्‍यार के फूल हम तो खिलाते रहे

अब भरोसा नहीं जिन्‍दगी का हमे

दर्द सह कर उसे हम मनाते रहे

जिन्‍दगी प्‍यार उनको सिखाती रही

और वो जिन्‍दगी को भुलाते रहे

साथ वो चल दिये है किसी गैर के

प्रीत की रीत हम तो निभाते रहे

आज की रात हम मर न जाये कही

पास अपने उसे हम बुलाते रहे

बात जब है चली बेवफाई की तो

बेवफा कह हमे वह बुलाते रहे

बात उनकी करे ना करे हम मगर

याद मे उन की आँसू बहाते…

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Added by Akhand Gahmari on May 18, 2014 at 9:22am — 20 Comments

अश्‍क

गजल अश्‍क

212   212     212    212

गीत उसके लिखे गुनगुनाता रहा

हाल दिल का सभी को बताता रहा

ये उदासी भरी जिन्‍दगी क्‍योंं मिली

सोच कर अश्‍क मैं तो  बहाता रहा

हम को उसके शहर में मिली मौत थी

लाश अपने शहर में जलाता रहा

चाँद में दाग है चाँदनी में नही

बात दिल को यही मैं बताता रहा

प्‍यार से चल सके ना कदम दो कदम

जाम पी पी तुझे तब भुलाता रहा 

मौलिक एवं अप्रकाशित…

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Added by Akhand Gahmari on May 15, 2014 at 10:30am — 26 Comments

गजल रचना ----वो पल

प्‍यार तुमसे किया तुम निभा ना सके

दर्द दिल का कभी हम मिटा ना सके

जिन्‍दगी तो हमारी रही ना मगर

मौत से हाथ भी हम मिला ना सके

चाँद कह कह पुकारा हमे जो तुने

उन पलो को कभी हम भुला ना सके

ना किये वेवफाई कभी हम मगर

बात का हम भरोसा दिला ना सके

टूट कर बिखर तो हम गये हैं मगर

खा लिये हम जहर पर खिला ना सके

रात भर आइ सपनो में तुम तो मगर

बात अपनी तुझे हम बता ना सके

लौट आता सुहाना समय वो मगर

गीत भी प्‍यार के हम सुना ना सके

थक गये है…

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Added by Akhand Gahmari on May 11, 2014 at 1:00pm — 8 Comments

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