For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s Blog – March 2021 Archive (6)

होली में - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२



कोई गर रंग डाले  तो  न खाना खार होली में

भिगाना भीगना जी भर बढ़ाना प्यार होली में।१।

*

मिलन का प्रीत का सौहार्द्र का त्योहार है ये तो

न हो ताजा  पुरानी  एक  भी  तकरार होली में।२।

*

मँजीरे ढोल की  थापें  पड़ा करती हैं फीकी सच

करे पायल जो सजनी की मधुर झन्कार होली में।३।

*

जमाना भाँग ठंडायी पिलाये पर सनम तुम तो

दिखाकर मदभरी आँखें करो सरशार होली में।४।

*

चले हैं  मारने  हम  तो  दिलों  से  दुश्मनी…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 28, 2021 at 2:00pm — 8 Comments

कभी दुख में भी मुस्कराकर तो देखो -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

१२२/१२२/१२२/१२२

कभी रिश्ते मन से निभाकर तो देखो

जो  रूठे  हुए  हैं  मनाकर  तो  देखो।१।

*

खुशी  दौड़कर  आप  आयेगी साथी

कभी दुख में भी मुस्कराकर तो देखो।२।

*

बदल लेगा रंगत जमाना भी अपनी

कभी झूठी हाँ हाँ मिलाकर तो देखो।३।

*

कभी  रंज  दुश्मन  नहीं  दे  सकेगा

स्वयं से स्वयं  को बचाकर तो देखो।४।

*

सदा  पुष्प  से  खिल  उठेंगे  ये रिश्ते

कि पाषाण मन को गलाकर तो देखो।५।

*

कोई…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 20, 2021 at 6:15pm — 7 Comments

पूरा किया है कौन वचन आपने जनाब -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२



चाहे कमाया खूब  हो धन आपने जनाब

लेेेकिन ज़मीर करके दमन आपने जनाब।१।

*

तारीफ  पायी  नित्य  हो  दरवार  में भले

मुजरा बना दिया है सुखन आपने जनाब।२।

*

ये  सिर्फ  सैरगाह  रहा  हम  को  है पता

माना नहीं वतन को वतन आपने जनाब।३।

*

उँगली उठायी नित्य  ही  औरों के काम पर

देखा न किन्त खुद का पतन आपने जनाब।४।

*

देखो लगे हैं  लोग  ये  घर  अपना फूँकने

ऐसी लगायी मन में अगन आपने जनाब।५।

*…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 16, 2021 at 8:30am — 9 Comments

तात के हिस्से में कोना आ गया - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२



तात के  हिस्से  में  कोना आ गया

चाँद को भी सुन के रोना आ गया।१।

*

नींद  सुनते  हैं  उसी  की  उड़ गयी

भाग्य में जिसके भी सोना आ गया।२।

*

खेत लेकर इक इमारत कर खड़ी

कह रहा वो  बीज  बोना आ गया।३।

*

डालकर  थोड़ा   रसायन ही  सही

उसको आँखें तो भिगोना  आ गया।४।

*

पा गये जगभर की खुशियाँ लोग वो

एक दिल जिनको भी…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 10, 2021 at 5:00pm — 12 Comments

पत्थर ने दी हैं रोज नजाकत को गालियाँ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/ २१२१/१२२१/२१२



पत्थर ने दी हैं रोज नजाकत को गालियाँ

जैसे नशेड़ी  देता  है  औरत  को गालियाँ।१।

*

भाती हैं सब को आज ये चतुराइयाँ बहुत

यूँ ही न मिल रही हैं शराफ़त को गालियाँ।२।

*

ये दौर नफरतों को फला इसलिए जनाब

देते हैं सारे  लोग  मुहब्बत  को गालियाँ।३।

*

दूल्हे को बेच सोचते खुशियाँ खरीद लीं

देता न कोई ऐसी तिजारत…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 9, 2021 at 5:30am — 8 Comments

वोट देकर मालिकाना हक गँवाया- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२२/२१२



दीप की लौ से निकलती रौशनी भी देख ली 

और उस की छाँव  बैठी  तीरगी भी देख ली।१।

*

वोट देकर मालिकाना हक गँवाया हमने यूँ

चार दिन में  सेवकाई  आपकी भी देख ली।२।

*

दुश्मनी का रंग हम ने जन्म से देखा ही था

आज संकट के समय में दोस्ती भी देख ली।३।

*

आ न पाये होश में क्यों आमजन से दोस्तो

दे के उस ने तो  हमें  संजीवनी भी देख ली।४।

*

खूब…

Continue

Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 5, 2021 at 2:09pm — 20 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
2 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
5 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
6 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
6 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
6 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
6 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
6 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"प्यादा एक बिम्ब है जो समाज के दरकिनार लोगों का रूप है। जिसके बिना कोई भी सत्ता न कायम हो सकती है न…"
7 hours ago
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
7 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
7 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service