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R N Tiwari's Blog – February 2011 Archive (7)

चक्र..

चक्र..

चैन और बेचैन का, चक्र चले दिन रात,

सुख दुःख के ही भोग में, यह आयी बारात.…

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Added by R N Tiwari on February 27, 2011 at 8:30pm — 7 Comments

लाभ क्या मिला ?

लाभ क्या मिला ?









लाभ क्या मिला ?

पिता जी की डायरी…
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Added by R N Tiwari on February 20, 2011 at 10:05am — No Comments

कर्म और भाग्य

पिताजी की डायरी से....



कर्म और भाग्य



बैठे बैठे दे दिया ,हाथ पावं न मैल',

चलते चलते मर गया, तेली के घर बैल.

कुत्ता चलता कर में, गाय न पावे घास ,

पास किया तो फेल है ,फेल हो गया पास.

कुछ न किया, सब हो गया,किसी का पूरा काम.

करत करत कोई थक गया ,मिला नहीं आराम.

फूंक फूंक कर पग धरे, बिगड़त जावे सब काम.

मसल मसल कर चल पड़े. दुनिया करे सलाम.

राम भरोसे पर रहे ,चलती जावे रेल.

धीरज कभी न छोडिये ,सब प्रभु का है खेल.

चींटी ले शक्कर चली,… Continue

Added by R N Tiwari on February 18, 2011 at 10:46pm — No Comments

तब और अब



तब और अब

कुशल छेम पूछत रहे , दिल में राखी सनेह I


चले गए वे लोग सब, तजि मानुष के देह II

समय समय का खेल यह, भला बुरा न होय I

कारन सदा अदृश्य है, जानि  सके न कोय II

चला गया सो चला गया , वर्तमान को जान I

आगे क्या फिर आएगा , उसको भी पहचान…

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Added by R N Tiwari on February 16, 2011 at 12:17pm — No Comments

पिताजी की डायरी से..

पिताजी की डायरी से..…















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Added by R N Tiwari on February 14, 2011 at 5:57pm — No Comments

दो आंख

 

 

 …

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Added by R N Tiwari on February 13, 2011 at 7:41am — No Comments

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