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MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI
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MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बहुत बहुत शुक्रिया , जनाब। "
Oct 31
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
" बहुत बहुत धन्यवाद , आपका।"
Oct 31
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"सादर आभार , आदरणीय "
Oct 31
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"सुंदर भावनात्मक अभिव्यक्ति, हार्दिक बधाई ।"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
" बहुत खूबसूरत बिम्ब चुने हैं और रोचक वार्तालाप भी। बधाई। "
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
" "इतना ही नहीं अब तो स्कूलों / कालेजों की पढ़ाई लिखाई भी ठेके पर ही कराई जाती है, समझे?" सुन्दर रचना। बधाई। "
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"बेहतरीन लघुकथा भाई जी। बस और कुछ नहीं। बधाई।"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"सुन्दर मानवेतर लघुकथा। रोचक संवाद। बधाई।"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"अक्सर ऐसा देखा गया है जो भी समाज सुधार की बात करता है उसे सहज स्वीकार नहीं किया जाता। बल्कि वह किसी षड्यंत्र का शिकार हो जाता है। और अपना ही मुँह खुद ही सिल लेता है। एक अच्छा विषय चुना है आपने। बहुत बहुत बधाई।"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"आजकल नामीग्रामी स्कूल में पढ़वाने के बावजूद भी पेरेंट्स सन्तुष्ट नहीं हैं। बढ़िया लघुकथा। बधाई।"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-43 (विषय: "आजकल")
"मायाजाल(विषय - आजकल)"आशी आई लव यू। ये कितना अजीब इत्तिफ़ाक़ है कि इतने दूर, देशों में रहते हुए भी हमारे विचार, हमारी सोच, हमारी पसंद - नापसन्द सब एक जैसी है।" सेनेगल में रहने वाली वाली लॉरा ने कुछ दिन मैसेंजर पर बात करने के बाद टूटी - फूटी…"
Oct 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-42 (विषय: "उम्मीद")
"सुन्दर  रचना।  बधाई "
Sep 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-42 (विषय: "उम्मीद")
"बढ़िया ,बहुत बहुत बधाई "
Sep 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-42 (विषय: "उम्मीद")
"बहुत शानदार। "थोड़ा बाढ़ का पानी उन पर भी छिड़क देना।" हार्दिक बधाई स्वीकार करें , आदरणीय। "
Sep 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-42 (विषय: "उम्मीद")
"सुन्दर  रचना।  बधाई"
Sep 30
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-42 (विषय: "उम्मीद")
"बढ़िया रचना।  बधाई "
Sep 30

Profile Information

Gender
Male
City State
BHOPAL MP
Native Place
rahatgarh sagar
Profession
employee

MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's Blog

असमर्थ ( लघुकथा )

इनआर्बिट माल से सागर ने आफिस के लिए फॉर्मल ड्रेसेस तो खरीद लीं थीं। अभी और ज़रूरी परचेसिंग बाकी थी। तभी अनायास उसकी नज़र एक टॉय सेन्टर पर पड़ी। बड़े से हाल में, एक रिमोट कंट्रोल्ड एयरोप्लेन गोल- गोल चक्कर लगा रहा था। उसे देखते ही सागर को अपना बचपन याद आ गया। अपने होमटाउन के सिटिमार्केट से गुज़रते वक़्त ऐसे ही एक खिलौने की दुकान से उसने चाबी से चलने वाले हवाई जहाज़ को खरीदने की ज़िद की थी और अपनी ज़िद पूरी करवाने के लिए…

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Posted on July 21, 2018 at 11:30pm — 5 Comments

तसल्ली  (लघुकथा)

 "अरे  ...  ये तुम्हारा नेटवर्क कभी भी आता - जाता रहता है। मैं तो परेशान हो गया। पुराना बदल कर, ये तुम्हारी कम्पनी का नया वाला ब्रॉडबेंड लिया। उसका भी यही हाल है। 

 तुम ही बोल रहे थे न , ...  कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।  सर्विसिंग भी अच्छी है। अब तुम्हारे साथ भी वही रोना है।" शर्मा जी  ने गुस्से से कहा।
नहीं सर, आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।

"ये लीजिये कनेक्टिविटी आ गई।",  उसने मॉडेम सेट करते हुए बोला । …
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Posted on July 19, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

"मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)

मौसम विभाग ने तो मई के अंतिम सप्ताह में ही सम्भावना व्यक्त कर दी थी कि इस साल औसत से कहीं अधिक बारिश होगी । सभी लोग इस खबर को पढ़ कर खुश भी थे ।   कल रात से ही मानसून का सिस्टम सक्रिय हो गया । बहुत तेज़ गरज के साथ बादलों की आवाजाही होने लगी। 

 एक दम काली घटा ने सारे आसमान पर जैसे क़ब्ज़ा जमा लिया हो। रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी।   सौरभ जैसे ही सुबह दस बजे घर से आफिस के लिए कार में जैसे ही बैठा , श्रुति बारिश में भीगती आईं , कार के…
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Posted on July 7, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

" उमस " ( लघु कथा )

" हेलो - क्या हाल है , आसिफ ? " मैं तो ठीक हूँ तलत ,

" लेकिन मौसम बहुत बेकार है दिन भर बादलों की आना जाना जारी है लेकिन बारिश की कोई संभावना नज़र नहीं आती । घनघोर घटाएँ छाती तो हैं लेकिन वैसी बारिश नहीं होती जैसी होनी चाहिए। हलकी फुल्की फौहार थोड़ी देर के लिए माहौल में ठंडक पैदा कर देती। सूरज की तपिश इसी ठंडक को उमस में परिवर्तित कर देती है। बस ये उमस ही बर्दाश्त से बाहर है। बड़ी बेचैनी होती है। एक अजीब सी घुटन है। 

काश ! कोई इन घटाओं से कह दे आएं…

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Posted on August 20, 2017 at 6:50am — 6 Comments

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At 7:56am on May 3, 2017, MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI said…

धन्यवाद 

At 12:35am on January 8, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

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