For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अजय कुमार सिंह
  • Male
  • Lucknow (U.P.)
  • India
Share on Facebook MySpace

अजय कुमार सिंह's Friends

  • विवेक मिश्र
 

अजय कुमार सिंह's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Lucknow
Native Place
Ghazipur
Profession
Doctor

अजय कुमार सिंह's Photos

  • Add Photos
  • View All

अजय कुमार सिंह's Blog

साथी! तोड़ न मेरे पात...

साथी! तोड़ न निर्दयता से चुन चुन मेरे पात...



नन्हीं एक लता मैं  निर्बल,

मेरे पास न पुष्प न परिमल,

मेरा सञ्चित कोष यही बस,

कुछ पत्ते कुम्हलाये कोमल,

तोड़ न दे यह शाख अकिञ्चन, निर्मम तीव्र प्रवात...



मैं हर भोर खिलूँ मुस्काती,

पर सन्ध्या आकुलता लाती,

साँस साँस भारी गिन गिन मैं,

रजनी का हर पहर बिताती,

एक नये उज्ज्वल दिन की आशा, मेरी हर रात...



पड़ती तेरी ज्वलित दृष्टि जब,

भीत प्राण भी हो जाते तब,

सहमी सकुचायी मैं…

Continue

Posted on January 22, 2014 at 3:30pm — 20 Comments

बोगेनविलिया की पंखुड़ियाँ

बोगेनविलिया की पंखुड़ियाँ

शायद खिलने वाली हैं...



तुमने कल की सारी बातें

जल्दी जल्दी चुन चुन कर,

अपनी जेबों में भर ली हैं

कितनी बेतरतीबी से,

कुछ तो खोकर भूल गयी हैं,

पर कुछ गिरने वाली हैं...



उस दिन कितनी कोशिश करके

हमने धूप बिछायी थी,

अल्फ़ाज़ों की कुछ शाखों से

कुछ पत्ते भी टूटे थे,

उन पर ठहरी खामोशी की

बूँदें झरने वाली हैं...



अलसाये नाज़ुक होठों की

हिलती डुलती टहनी पर,

कोहरे वाले मौसम में भी

पीली… Continue

Posted on January 15, 2014 at 2:04pm — 12 Comments

बग़ावत तज़ुर्बे से...

रूबरू होता हूँ मैं उससे आजकल जब भी,
देखता हूँ उसे हैरत भरी निगाहों से,
उसके चेहरे पे घिरी रहती है एक मायूसी,
और निगाहों में कोई तल्ख़ सी उदासी भी,
उसकी मानो तो, हक़ीकत यही उदासी है,
और उसके लिये हर ख्वाब महज़ धोखा है,
मुझसे कहता है वो, कि "तुम भी बदल जाओगे,
तुमसे जब ज़िन्दगी के सच का सामना होगा।"
है वो वाक़िफ़ बग़ैर-शक़ बड़े तज़ुर्बों से,
और देखा है ज़माने को भी मुझसे ज्यादा,
उसने महसूस किये…
Continue

Posted on December 19, 2013 at 12:30pm — 12 Comments

कौन जाने...

कौन जाने

सिर्फ मैं हूँ,

या कि कोई और भी है,

जो उलझता है,

तड़पता है,

झुलसता है,

कभी फिर

बुझ भी जाता है...

जो उलझता है,

कि जैसे

ज़िन्दगी के क़ायदे-क़ानून

बनकर साजिशों के तार

चारों ओर से घेरा बनाकर

हर नये सपने

हर एक ख़्वाहिश

के सीने में चुभाकर

रवायतों की सलाईयाँ,

बुनते और बिछाते जा रहे हों

मकड़ियों के जाल...

जो तड़पता है,

उसी मानिन्द

जैसे सीपियों…

Continue

Posted on November 27, 2013 at 5:51pm — 13 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
20 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
yesterday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service