For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अजय कुमार सिंह's Blog (6)

साथी! तोड़ न मेरे पात...

साथी! तोड़ न निर्दयता से चुन चुन मेरे पात...



नन्हीं एक लता मैं  निर्बल,

मेरे पास न पुष्प न परिमल,

मेरा सञ्चित कोष यही बस,

कुछ पत्ते कुम्हलाये कोमल,

तोड़ न दे यह शाख अकिञ्चन, निर्मम तीव्र प्रवात...



मैं हर भोर खिलूँ मुस्काती,

पर सन्ध्या आकुलता लाती,

साँस साँस भारी गिन गिन मैं,

रजनी का हर पहर बिताती,

एक नये उज्ज्वल दिन की आशा, मेरी हर रात...



पड़ती तेरी ज्वलित दृष्टि जब,

भीत प्राण भी हो जाते तब,

सहमी सकुचायी मैं…

Continue

Added by अजय कुमार सिंह on January 22, 2014 at 3:30pm — 20 Comments

बोगेनविलिया की पंखुड़ियाँ

बोगेनविलिया की पंखुड़ियाँ

शायद खिलने वाली हैं...



तुमने कल की सारी बातें

जल्दी जल्दी चुन चुन कर,

अपनी जेबों में भर ली हैं

कितनी बेतरतीबी से,

कुछ तो खोकर भूल गयी हैं,

पर कुछ गिरने वाली हैं...



उस दिन कितनी कोशिश करके

हमने धूप बिछायी थी,

अल्फ़ाज़ों की कुछ शाखों से

कुछ पत्ते भी टूटे थे,

उन पर ठहरी खामोशी की

बूँदें झरने वाली हैं...



अलसाये नाज़ुक होठों की

हिलती डुलती टहनी पर,

कोहरे वाले मौसम में भी

पीली… Continue

Added by अजय कुमार सिंह on January 15, 2014 at 2:04pm — 12 Comments

बग़ावत तज़ुर्बे से...

रूबरू होता हूँ मैं उससे आजकल जब भी,
देखता हूँ उसे हैरत भरी निगाहों से,
उसके चेहरे पे घिरी रहती है एक मायूसी,
और निगाहों में कोई तल्ख़ सी उदासी भी,
उसकी मानो तो, हक़ीकत यही उदासी है,
और उसके लिये हर ख्वाब महज़ धोखा है,
मुझसे कहता है वो, कि "तुम भी बदल जाओगे,
तुमसे जब ज़िन्दगी के सच का सामना होगा।"
है वो वाक़िफ़ बग़ैर-शक़ बड़े तज़ुर्बों से,
और देखा है ज़माने को भी मुझसे ज्यादा,
उसने महसूस किये…
Continue

Added by अजय कुमार सिंह on December 19, 2013 at 12:30pm — 12 Comments

कौन जाने...

कौन जाने

सिर्फ मैं हूँ,

या कि कोई और भी है,

जो उलझता है,

तड़पता है,

झुलसता है,

कभी फिर

बुझ भी जाता है...

जो उलझता है,

कि जैसे

ज़िन्दगी के क़ायदे-क़ानून

बनकर साजिशों के तार

चारों ओर से घेरा बनाकर

हर नये सपने

हर एक ख़्वाहिश

के सीने में चुभाकर

रवायतों की सलाईयाँ,

बुनते और बिछाते जा रहे हों

मकड़ियों के जाल...

जो तड़पता है,

उसी मानिन्द

जैसे सीपियों…

Continue

Added by अजय कुमार सिंह on November 27, 2013 at 5:51pm — 13 Comments

गीत - मूढ़ तू क्या कर सकेगा, अनुभवी जग को पराजित!

मूढ़ तू क्या कर सकेगा, अनुभवी जग को पराजित!

है सदा जिसको अगोचर, प्राण की संवेदना भी,

क्यों करे तू उस जगत से प्रेम-पूरित याचना ही,

तू करेगा यत्न सारे भावना का पक्ष लेकर,

किन्तु तेरे भाग्य में होगी सदा आलोचना…

Continue

Added by अजय कुमार सिंह on September 25, 2013 at 2:00am — 15 Comments

अब न मैं भयभीत तुझसे, मेघ माघी..!!

अब न मैं भयभीत तुझसे, मेघ माघी..!!

मैं पड़ी थी,

एक युग से चिर निशा की कालिमा में कैद कल तक,

रश्मि से अनजान, रवि की लालिमा से भी अपरिचित,

दृष्टि में संकोच का संचार, भय से प्राण सिमटे,

दृग झुके से, अश्रु प्लावित, अधर भी अधिकार वंचित,…

Continue

Added by अजय कुमार सिंह on September 22, 2013 at 12:33am — 8 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
1 hour ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service