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हरो बाधा सभी हनुमन.....

विधाता छंद
हरो बाधा सभी हनुमन.........शरण मैं आपकी आया।
करो मुझपर कृपा ऐसी,....विमल हो बुद्धि मन काया।।
नमन करता सदा भजता,.........हृदय से केशरी नंदन।
द्रवित हों अंजनी लाला, पवन सुत सुन विनय वंदन।१।

सिया के राम लगते हैं,........सदा जिनको बहुत प्यारे।
दुलारे राम सीता के,.........लखन भ्राता सरिस न्यारे।।
भरत सम राम सीता को,.....सुमिर नित उर बसायें हैं।
कहूँ मैं सत्य बजरंगी,........... वही मन में समायें हैं।२।

मौलिक व अप्रकाशित

-सत्यनारायण सिंह

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