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जानी ले की तुहू कमइबा जाई प्रदेश ,
हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस ,
बालम तू मति जा तू मति जा तू मति जा प्रदेश ,

मई बाप के छोर के आईनी छोरनी सखी सहेलिय ,
तोहरा बिना के बा आपन तुही बोलs सनेहिया ,
तू जे बालम चल जइबा ता मन के लगी ठेस ,
हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस ,
बालम तू मति जा तू मति जा तू मति जा प्रदेश ,

तहरे से गोरिया हमारो लागल बाटे नेहिया ,
तहरे लगे मन रही उहवा रही हमार देहिया ,
बाबूजी और मई के संगे तोहर कटी दिन शेष ,
हमरो के त काटे धाई गोरिया हो प्रदेश ,
हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस ,
बालम तू मति जा तू मति जा तू मति जा प्रदेश ,

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Replies to This Discussion

dhanyabad amrendar bhai
यह कविता पढ़ने के बाद यह लगता है की ,सही मे किसी भारतीय नारी ने अपने पति के परदेश जाते वक़्त अपने मन की भाव को obo के मंच पर रख दिया है.गुरु जी अपने एक नारी के वास्तविक दर्द को बयान किया है .धन्यवाद
ratnesh bhai jawan man me aail u likha gail raura pasand aail dhanyabad,
जानी ले की तुहू कमइबा जाई प्रदेश ,
हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस ,
बालम तू मति जा तू मति जा तू मति जा प्रदेश ,

मई बाप के छोर के आईनी छोरनी सखी सहेलिय ,
तोहरा बिना के बा आपन तुही बोलs सनेहिया ,
तू जे बालम चल जइबा ता मन के लगी ठेस ,
हम कईसे जिआब बलमुआ धरी जोगनी के भेस ,


Ravi ji, hamesh ke tarah ego aur sajeev varnan wala rachna pesh kayini. Padh ke sahaj mein hi jogini ke dard ke ehsas ho jat ba. bahut bahut dhanyawaad eh rachna khatir.
neelama ji rauo ke bahut bahut dhanyabad ye ijajat afjai khatir

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