For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 

डॉ गोयल ने चिकित्सा व साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में अपना सम्यक व महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है | शल्य चिकित्सा से जुड़े रहने के बावजूद आपका साहित्य के प्रति जुड़ाव एक सुखद व प्रेरणास्पद एहसास देता है | आपने इन दोनों ही क्षेत्रों में अपनी मौलिक प्रतिभा व मेहनत की सीमा के शीर्ष को स्पर्श किया है | भौतिकता की चकाचौंध के बीच जिस प्रकार संतुलित ढंग से आपने अपने सम्पूर्ण जीवन को सुव्यवस्थित किया, वह काबिले तारीफ है | आपकी ‘डाउन टू अर्थ’ क्वालिटी आपको महानतम व्यक्तियों की श्रेणी में खड़ा करती है, बस इससे ज्यादा मैं आपके बारे में क्या कहूँ !

प्रस्तुत पुस्तक अपने समय का न सिर्फ एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है बल्कि इसकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में भी उतनी ही है जितनी कि लेखक के समय में | इसे साहित्य की किस विधा के अंतर्गत रखा जाय इसमें विद्वानों को मतभेद हो सकता है परन्तु मेरे हिसाब से इसे आत्मकथा कहना ज्यादा समीचीन होगा |

पुस्तक की शुरुवात में ही लेखक का आत्मनिवेदन उसे पाठक के साथ खड़ा कर देता है और फिर ऐसा आत्मिक जुड़ाव गंठ जाता है कि पाठक उसे पूरा पढ़े बिना नहीं रह पाता | लेखक और पाठक के बीच की खाई को पाटने में सिद्धहस्त लेखक की यही विशेषता उसे समकालीन लेखकों की परंपरागत श्रेणी से अलग खड़ा करती है |

सम्पूर्ण पुस्तक तीन खण्डों में विभाजित है | उ.प्र. के जिला बुलंदशहर (अब गौतमबुद्धनगर) के एक छोटे से कसबे दनकौर से शुरू हुआ लेखक का जीवन क्रमिक व सहज रूप से विकसित हुआ | गाँव का सरकारी स्कूल, वहां के गुरुजनों की सुखद यादें, माता-पिता के संग खेलता बचपन, शैतानियाँ, संस्कार व परिवारी जनों का लाड़प्यार ! लेखक ने इन सब बीती बातों की सुखद स्मृतियों को बड़ी सटीक व मार्मिक अभिव्यक्ति दी है | उसके बाद अपनी सघन मेधा व मेहनत के बल पर उसका चयन पीएमटी में हो गया तत्पश्चात किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में लेखक के छात्र जीवन का रोचक वर्णन पाठकों को आनंदित करता है | जिंदगी के लगभग हर पहलू को समेटते हुए लेखक ने अपने जीवन में घटने वाले छोटे-बड़े सभी प्रसंगों को बड़ी ईमानदारी व सच्चे मन से प्रकट किया है |

लेखक की भाषा-शैली प्रवाहपूर्ण है जो कि पाठक के मन पर सीधा प्रभाव डालती है | संक्षेप में इस पुस्तक में न सिर्फ लेखक बल्कि मानवमात्र की स्मृतियों, अनुभवों व भारतीय संस्कृति के अनुपम संस्कारों को बड़े अच्छे तरीके से संजोया गया है | सद्विचारों से परिपूर्ण लेखक की गहरी मानवीय संवेदनाएं पाठकजन के हृदयस्थल पर अपनी अमिट पहचान बनाती चली जाती हैं |

प्रस्तुत पुस्तक का अध्ययन हमें आशा व उल्लास से परिपूर्ण एक नया जीवनदर्शन देता है | पांच विशिष्ट सम्मानों से अलंकृत इस जीवनोपयोगी कालजयी कृति का हिंदी के अतिरिक्त अन्य भाषाओँ में अनुवाद अपेक्षित है, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा पाठकजन इससे लाभान्वित हो सकें |

समीक्ष्य पुस्तक- दनकौर से लखनऊ तक (तृतीय संस्करण)

लेखक- डॉ टी. सी. गोयल

समीक्षक- राहुल देव

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 653

Replies to This Discussion

किसी पुस्तक की समीक्षा मात्र कथ्य या आत्मपरक वर्णन न हो कर उस पुस्तक के सांगोपांग गुणों को समुचित ढंग रखने की लेखकीय कला है. यह लेखन किसी सचेत पाठक द्वारा समीक्ष्य पुस्तक का परिचय हुआ करता है.

उ.प्र. के जिला बुलंदशहर (अब गौतमबुद्धनगर) के एक छोटे से कसबे दनकौर से शुरू हुआ लेखक का जीवन क्रमिक व सहज रूप से विकसित हुआ | गाँव का सरकारी स्कूल, वहां के गुरुजनों की सुखद यादें, माता-पिता के संग खेलता बचपन, शैतानियाँ, संस्कार व परिवारी जनों का लाड़प्यार ! लेखक ने इन सब बीती बातों की सुखद स्मृतियों को बड़ी सटीक व मार्मिक अभिव्यक्ति दी है | उसके बाद अपनी सघन मेधा व मेहनत के बल पर उसका चयन पीएमटी में हो गया तत्पश्चात किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में लेखक के छात्र जीवन का रोचक वर्णन पाठकों को आनंदित करता है | जिंदगी के लगभग हर पहलू को समेटते हुए लेखक ने अपने जीवन में घटने वाले छोटे-बड़े सभी प्रसंगों को बड़ी ईमानदारी व सच्चे मन से प्रकट किया है

उपरोक्त वाक्य स्पष्ट रूप से साझा करते हैं कि प्रस्तुत पुस्तक संस्मरणात्मक है या आत्मकथ्य, जिसके अपने उद्येश्य हैं. उद्येश्य के उन विन्दुओं के अंतर्गत लेखन सदा से किसी पुस्तक को मिली मान्यता का कारण हुआ करती है.
फिर समीक्षा-लेखक द्वारा यह कहना कि इसे साहित्य की किस विधा के अंतर्गत रखा जाय इसमें विद्वानों को मतभेद हो सकता है परन्तु मेरे हिसाब से इसे आत्मकथा कहना ज्यादा समीचीन होगा,  अनावश्यक रूप से पुस्तक की संज्ञा के अर्थों में ’कुछ विशेष समझ’ में आ जाने के रूप में समीक्षा-पाठकों सामने आता है. ऐसी किसी ’समझ’ की क्या आवश्यकता हो सकती है यह सदा से प्रश्नों के दायरे में रहेगी. 

बहरहाल, एक नये पुस्तक को सामने लाने के लिए समीक्षा-लेखक भाई राहुल देव को अनेकानेक शुभकामनाएँ.. .
शुभ-शुभ

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
13 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service