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गज़लशाला ( आप भी जाने कि ग़ज़ल कैसे कही जाती है )

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सम्मानित सदस्यों,
सादर अभिवादन,
मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि आदरणीय श्री पुरुषोतम अब्बी "आज़र" जी द्वारा प्रत्येक सप्ताह के शुक्रवार को "ग़ज़ल कैसे कही जाती है" विषय मे विस्तृत चर्चा की जायेगी, आप सब से अनुरोध है कि श्री "आज़र" साहब के अनुभवों से लाभ उठाये,
धन्यवाद |

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आदरणीय ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सदस्यों,
मैने आदरणीय आजर साहिब से नये पोस्ट के लिये निवेदन पत्र लिख दिया था और यह भी बता दिया था कि हम सब नये अंक का इन्तजार कर रहे है किन्तु किसी कारणवश अभी तक उनका जबाब नहीं मिल सका है |
आपका
एडमिन
OBO
श्री पुरषोत्तम अजर जी
जय हिंद
आपके सारे पाठ मैंने ध्यान पूर्वक पढे है , इस बेहतरीन कार्यशाला के लिए आपको दिल बधाई हो.! मगर आपके पहले 2 पाठों को छोड़ कर बाकी किसी में भी ग़ज़ल की तकनीक के बारे में कुछ नहीं बताया गया सिर्फ इतिहास ही बताया गया है ! अगर कुछ गलत कह गया तो क्षमा प्रार्थी हूँ.
Ek taraf to site par maulik rachanaon ki baten ho rahi hai aur doosari taraf janab aazar sahab pichali 6 poston se copy aur past kiye ja rahe hai.

http://podcast.hindyugm.com/2008/10/musical-trubute-to-legend-poet-...
मूल आलेख- डा.अर्शद जमाल
(आईना-ए-ग़ज़ल से liyas hua)
janab ne ek bhi bar jahamat nahi uthai ki sandarbh bata de.
thx
आज चर्चा मैं इस दौर के दो मशहूर शायर’दा़ग’ और ‘अमीर मीनाई’ से कर रहा हूं जब की यह दोनो ही अपने-अपने फ़न में माहिर होने के बावजूद एक दूसरे पर छींटा-कसी करने से बाज नहीं आते थे सुना तो यहां तक जाता है की आपस में सामना होने पर गले मिलने से भी नही चूकते थे !

दाग देहलवी:-
हजारों ख्वाहिशें ऐसी, कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं, लेकिन
बहुत बेआबरू होकर, तेरे कूचे से हम निकले

मुहब्बत में नहीं है, फर्क जीने ओर मरने का
उसी को देख कर जीते हैँ, कि जिस काफिर पे दम निकले

कहाँ मैखाने का दरवाज़ा गालिब, ओर कहाँ वाईज़
वस इतना जानते हैँ कल वो जाता था कि हम निकले


azaar sahab .. ye ghazal chacha ghalib ki likhi hue hai,
makte mai unka takhalus bhi hai

aap nazr-e-saani kar leN
मैं पंजाबी में लिखी जाने वाली गजल और हिन्दी गज़ल में भेद जानना चाहता हूँ
मार्ग दर्शन कीजिए
are nahi sahab hum naraaj nahi, bas padh rahethey aapkaa likha hua ...

bas batane ki zahmat ki, socha shayed hum bhi galt ho...

khair nateeja acha niklna chahiye

aap mujhe Fikr kah sakte hai ye mera takhaluss hai :)

isse jyda fir kabhi
hmmm

ji sahab ye banda nacheez kozi kamlaa hai,

apne durust farmaya..

ap ek lafz se meri mansikta pahchaan gaye :)

aap sach mai ustaad haiN "

aapko sadar pranaam :)
aadaab aazar sahab
mubarak ho aapko k aap itni mehnat se adab ki khidmat ker rahein hai
aapne jo sher likha hai
तू चली गई सपनों से आंचल समेंट कर
संग गुजरे लम्हों का वो हर पल समेंट कर
iski takhti batayein , mere ilm me izafa hoga
azer ji

maine dekha ki baha kuch mistake huee hai, isko sahi kiyaa jana chahiye , isliye aapko batayaa na hi koe narjgi thi na hi kuhc...
fark kisi ko nahi padta lekin... jab kuch chaspaa hota hai, to sab padhte hai, aur humari koshish yahi honi chahiye ki galtiyaan kam ki jayeN ... likhne mai galti honaa aam bata hai, ye kisi se bhi ho sakti hai.... isme ustaad hone wali koe baat nahi
...

mere khyaal mai ustaad woh hai, jo galti theek kare, chahe woh apni hi kyun na ho ....

aur are .. ka sambodhan koe ... galat nahi hai ...... ye sirf ek gesture ke hisaab se hota hai ....

aapko isse hi kisi ki mansiktaa ka pata chal jata hai, to ye aapka koe uhnar hoga jo kam dekhne ko milta hai ...

khair

akhir mai Dr. satinder sartaj sahab ki kuch line ....
je koe dasse gal tazurbe wali
ta sun laiye, gall na pa'iye
ban jaiye ustaad bhaaviN
ta bhi sikhde rahiye ......!!
उस्ताद जी, अभिवादन, मैं शुरू से ग़ज़लशाला का नियमित पाठक हूँ और प्रत्येक शुक्रवार को इंतजार करता हूँ कि आज कुछ सीखने को मिलेगा, पर आज तक तो कुछ समझ मे नही आया, मैं यदि सीखना चाहता हूँ तो इसका मतलब मुझे कुछ नही आता, और यहाँ पर बड़ी बड़ी बात बहर, फैलतुन, फ़ालूं , अफ़लातून, मकता , मतला, काफिया , रदिफ़ और भी मोटी मोटी बाते, सच कहता हूँ कुछ नही पल्ले पड़ता,
मैं तो यह सोच कर ग़ज़लशाला पढ़ता हूँ कि उस्ताद यह बताएँगे कि काफिया, रदिफ़, मिसरा, मतला या और भी ग़ज़ल से संबंधित शब्द कहे किसको जाते है ? कैसे हम जानेगे कि रदिफ़ क्या है और काफिया क्या है ?
पर मुआफ़ कीजियेगा उस्ताद जी अभी तक नये लोग के लिये यहाँ कुछ भी नही है |
जीवन् के लिए वसन चाहिए या ,वसन के लए जीवन्,?
ग़ज़ल को ले कर अनेक भारांतिया हैं ; नवन्ग्तुक का सवाग्त किया
जाना चाहिए; ग़ज़ल के धरम के साथ साथ ग़ज़ल का मर्म भी जीतना चाहिए;

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