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मैं ललित मोदी नहीं हूं, मैं सुरेश कलमाड़ी हूं? और मैं शीला दीक्षित ( हास्य व्यंग )

मैं ललित मोदी नहीं हूं कि कोई मुझे बर्खास्त कर सकता है? मैं सुरेश कलमाड़ी हूं, भाई सुरेश कलमाड़ी मेरा नाम है, मै चाहे जितना भी घोटाला कर लू कोई मॉ का लाल नहीं कि मुझे बर्खास्त कर सके, बर्खास्त करना तो दूर की बात है मेरा कोई एकाउंट सील करा के तो देखे और मै आपको ये भी बता देता हूँ कि मेरे बैंक एकाउंट में अरबो रूपया गैर कानूनी है। ललित मोदी को बर्खास्त कर दिए तो क्या मुझे भी कर देगा क्या कोई ? किसी कि मजाल नहीं है। मैं सबकी पोल खोल के रख दूंगा, इस हमाम में सभी नंगे है।

और मैं शीला दीक्षित हूँ , दिल्ली प्रदेश की महारानी साहिबा , यहाँ मेरी इजाजत के बिना एक परिन्दा भी पर नहीं मार सकता, दिल्ली की जनता मेरी गुलाम है। यह मणिशंकर की क्या औकात, उनको तो मेरा बेटा संजीव दीक्षित भी गम्भीरता से नहीं लेता तो मै उसकी बातों का क्या परवाह करुँगी ? उनको आज कल कमाने और लूटने को नहीं मिल रहा है तो वो मुंह फाड़ रहे है।

जब मेरा सुप्रीम कोर्ट कुछ नहीं बिगाड़ सकती तो और किसी की क्या मजाल? कोर्ट में ये साबित हो गया कि दिल्ली प्रदेश के 80 प्रतिशत अधिकारी भ्रष्ट है तो भी मै अभी दिल्ली प्रदेश में अपनी मनमानी से सरकार चला रही हूँ । दिल्ली प्रदेश से मैने 35000 हजार घरों को तोड़वा दिया, तब तो कोई कुछ कर ही नहीं सका। मैं दिल्ली को अमीरो की दिल्ली बनाना चाहती
हूँ । तभी तो मैं उनसे मोटा पैसा वसूल कर सकती हूँ , नहीं तो ये गरीब-भीगमंगी जनता क्या देगी, इसीलिए इस कॉमनवेल्थ खेल के बहाने सबको बाहर का रास्ता दिखा दिया और कुछ इस महंगाई की मार ने दिल्ली को छोड़ने को मजबूर करवा दिया।

मुझे तो अपने क्रांग्रेसी साथियों से बस इतना ही कहना है कि सयंम रखे सबको अपना जेब भरने का मौका मिलेगा। वो भी एक दिन मलाई खाएगे, और अपना बैंक बैलेंस करेगें। अभी तो मेरा राज्य है और मुझे लूटने दो।"

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jai ho kuldeep bhai ki,
आदरणीय कुलदीप कुमार जी, सर्वप्रथम मैं ओपन बुक्स ऑनलाइन के मंच पर आपके पहले पोस्ट का स्वागत करता हूँ , बहुत ही बढ़िया हास्य व्यंग आपने लिखा है , पाठको से भी मेरा निवेदन है की इस हास्य व्यंग को हास्य के रूप मे ही पढ़े,कुलदीप जी की रचनाओ और लेखो का आगे भी हम सब को इन्तजार रहेगा, धन्यवाद,
bahut badhiya wyang hai.

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