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आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-133 

विषय - "विषय से मुक्त"

आयोजन अवधि- 13 नवम्बर 2021, दिन शनिवार से 14 नवम्बर 2021, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 13 नवम्बर 2021, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
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मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

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संयम नियम सावधानी और मास्क जरूरी है

जब शत्रु हमें दिखाई न दे, हर पल डरना जरूरी है।
आस पास ही घूम रहा है, घर में रहना जरूरी है॥

नित्य घरेलू उपायों से, वायरस से लड़ना जरूरी है।
शाम सबेरे राधेकृष्ण को, हर दिन जपना जरूरी है॥

मास्क लगाएँ गले ना मिलें, दूरी रखना जरूरी है।
सेनेटाइजर से बार बार, हाथों को मलना जरूरी है।।

जो संयम और नियम बताएँ, पालन करना जरूरी है।
परेशान हैं गाँव शहर पर, कुछ दिन सहना जरूरी है॥

भजन आरती साथ शंख का, हर दिन बजना जरूरी है।
एक साथ हनुमान चालीसा, हर दिन कहना जरूरी है।।

मौलिक अप्रकाशित

आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी, सावधानी दुर्घटना से बचाती है। इसी तरह आपकी रचना अति सुंदर सीख भरी है। आज जब लोग कोरोना के प्रति लापरवाह हो गये है और मास्क लगाने वाले भी कम हो रहे है तो ऐसे समय में आपकी रचना महत्वपूर्ण् एवं सामयिक रचना है। हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

दोहा छंद 

चिड़ियाँ गड़ती नीड़ है , तिनके -तिनके जोड़ | 

अण्डे   देती   नीड़  में , सेत   रेन   से   भोर || 

दाने लाती दूर से , पुत्र प्रेम की सोंच | 

देती दाने चोंच में ,डाल चोंच में चोंच || 

उड़ना सिखलाती उसे ,ले अम्बर में साथ | 

जाता उड़कर छोड़ तब , आता है ना  हाथ ||

सूना -सूना नीड़ है ,अंखियाँ अंश्रु धार | 

बैठी वो गमगीन है ,अपने मन को मार ||

मौलिक व अप्रकाशित   

आदरणीय चौथमल जैन जी, दोहा छंद आधारित सुंदर रचना के लिए धन्यवाद। रचना पोस्ट करने के लिए भी धन्यवाद। लेकिन सोंच शब्द सही नहीं। आपने चोंच से तुकांत मिलाने के लिए ऐसा किया है पर ये ठीक नहीं है। सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।

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आवश्यक सूचना:-

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