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Sushil Sarna's Discussions (1,416)

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"साँसे मुश्किल ,चलना भारी ,आँखें मुंदती ,रास्ता भी नहीं सुहाता है ,जीवन थका ,बोझिल ,र…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"हाँ, मैं तो छा गयासोते हुओं को उलझा गयामत कीजिएअलंकृत या कलंकितघिसे-पिटे, घोर नकारात…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सिर्फ़ उल्फ़त निभाओ कुहरा है /आज मत आज़माओ कुहरा है / आप घर आज जा न पाएंगेशब यहीं पर बि…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"ऐ फिज़ा !अहसान हम पर कर जरा,इतना बता-इस घने कुहरे के पीछे कुछ छिपा है या नहीं?दास्ताँ…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आडम्बर का पिंजरा था वोसारे सपने क़ैद हो गयेलंबे बोझिल पतझड़ में फिरमन बसंत के रंग खो ग…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वाह आदरणीय विजय प्रकाश जी प्रदत विषय को जीवन संग जोड़ साकार करती आपकी इस प्रस्तुति के…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वाह आदरणीय प्रदत विषय पर  सुंदर  प्रस्तुति हुई है , हार्दिक बधाई। "

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"छन्न पकैया छन्न पकैया , कुहरा ऐसा छायासूरज भी तो अपने घर से , देखो निकल न पाया......…"

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आदरणीय प्रदत विषय पर सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति हुई है , हार्दिक बधाई। "

Sushil Sarna replied Feb 13, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

"कितना कोहरा है फिर भी तुम मुझे साफ़ नज़र आती हो मेरी रातों की तुम अनबुझ प्यास नज़र आती…"

Sushil Sarna replied Feb 12, 2016 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-64

854 Feb 13, 2016
Reply by मिथिलेश वामनकर

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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