For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

rajesh kumari's Discussions (9,804)

Discussions Replied To (7515) Replies Latest Activity

"हां हा हा राजेश अजनबी साहिबा :))))) मै अजनबी नहीं हूँ साहब सब जानते हैं मुझे . आपको…"

rajesh kumari replied Nov 24, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"मैं भी इस बात से सहमत हूँ अफरोज़ साहब पढने पर यही लग रहा है कि मुदावा के लिए सलाम करे…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"वाह्ह्ह्ह बहुत उम्दा गज़ल कही है मोहम्मद अनीस जी दिल से मुबारकबाद पेश करती हूँ  चाँद…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"पहले मिसरे को इस तरह कर सकते है .बांटकर इश्क नेक काम करें  अंतिम शेर का उला इस तरह क…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"आद० बासुदेव जी बहुत अच्छी गज़ल कही है शेर दर शेर बधाई प्रेषित है .जो कहना चाहती थी सम…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"अच्छी ग़ज़ल कही है बलराम जी दुसरे शेर में मिसरों में राब्ता नहीं दिख रहा है बाकी अशआर…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"वाह संतोष जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है मुबारकबाद आपको "

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"जनाब अफरोज़ साहब बहुत उम्दा गज़ल कही है शेर दर शेर मुबारकबाद देती हूँ "

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"मोहतरम जनाब तस्दीक साहब बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है शेर दर  शेर दाद स्वीकारें "

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

"आद० सुरेन्द्र नाथ भैया बहुत उम्दा गज़ल कही है क्या कहने शेर दर शेर दाद हाज़िर है  सेवा…"

rajesh kumari replied Nov 23, 2018 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-101

930 Nov 24, 2018
Reply by Samar kabeer

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
12 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Tuesday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

 अभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही मधुगंध ।। प्रेम लोक की कल्पना,…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Feb 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 6
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Feb 5
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Feb 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service