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Sushil Sarna's Discussions (1,416)

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"आशियाने में सभी आई हैं यह थक हार केमार के पत्थर न चिड़यों को उड़ाओ धूप है | वाह आदरणीय…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह आदरणीय टी आर शुक्ला जी प्रदत विषय को सार्थक करती आपकी इस सुंदर प्रस्तुति के लिए…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"डरो ना ग्लोबल वार्मिंग से, शाकाहारी बन जाओ। बदल दो धूप को उर्जा में, धरती को स्वर्ग…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"गीतों में भावों की माला सीतारों में सजी सप्तम सुर-कीबाँस-बाँसुरी हम-तुम ,तुम हमराग-र…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"आदरणीय सतविंदर कुमार जी प्रदत विषय पर बहुत ही सुंदर कुण्डलिया छंद बना है। हार्दिक बध…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"रोशनी जब जली धूप हैआज की मनचली धूप है।1 वाह आदरणीय ,मनन साहिब क्या खूब ग़ज़ल कही है। प…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"तर्क भारी गढ़ रहे हैंपर विवेक मूक है उनके बंद द्वार से ,लौट गई धूप है I आदरणीया प्रति…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"दश्त-ए-बे आब में हम अकेले नहींजल गये हैं बहुत से चमन धूप में वाह बहुत खूब आदरणीय समर…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह आदरणीय गिरिराज भंडारी जी  बहुत खूब   ... प्रदत विषय को जीवन के गतिचक्र से जोड़ कर…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

"वाह आदरणीय बागी सर प्रदत विषय पर बहुत संवेदनशील प्रस्तुति बनी है। अव्यक्त को व्यक्त…"

Sushil Sarna replied Mar 11, 2016 to "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65

997 Mar 13, 2016
Reply by नयना(आरती)कानिटकर

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
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