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Chetan Prakash's Discussions (714)

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"              "दौड़, समय से" अभी  तो परीक्षा  के  पाँच महीने हैं, मुझे आप  केवल  चा…"

Chetan Prakash replied Feb 27, 2021 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-71 (विषय: दौड़)

38 Mar 1, 2021
Reply by Sheikh Shahzad Usmani

" आदाब, तत्काल  ही गिरह का शे'र जोड़ दिया  था लेकिन  किसी भाई के उसी  समय टिप्पण करते…"

Chetan Prakash replied Feb 26, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"आदाब, भाई  श्री लक्ष्मण  धामी 'मुसाफिर '  ! काश 'सुधीजनों' की सलाह  की पड़ताल  करने…"

Chetan Prakash replied Feb 26, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"आदाब, सलिक गणवीर साहब,  बह्र  से खारिज मिसरे  उदाहरण  सहित  दोष बद्ध किस तरह है, कृप…"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"आदाब,  सु  श्री रचना भाटिया जी,  कृपया, संदर्भित  माननीया  को संबोधित   मेरा प्रत्यु…"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"भाई, नाथ सोनांचली, नमस्कार  ! ग़ज़ल का प्रयास  ही  कि या , शुद्ध  ग़ज़ल  कही  है ,भ्…"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"आदाब , मोहतरम कबीर  साहब , ग़ज़ल तक आपकी  आमद हुई,  आभारी  हूूँ ! "

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"आदाब, आदरेया, सु  श्री  राजेश कुमारी जी।  तीसरे शेर का ऊला, " शबे ग़म तनहा रहे थे भी…"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"बहुत धन्यवाद ,  भाई नीलेश !"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

"गिरहः बारहा हम से ही सौगात दिखाई न गई क्या हुआ उनसे अगर बात बनाई न गई"

Chetan Prakash replied Feb 25, 2021 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-128

375 Feb 26, 2021
Reply by नादिर ख़ान

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"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
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