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Er. Ganesh Jee "Bagi"'s Discussions (8,124)

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मुख्य प्रबंधक

"वोह ! दीदी, किसी तरह के डाउट के लिए "मैं हूँ ना" आप पूछी होती, हम लोग OBO संचालन सम्…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied May 4, 2011 to जानिये अपने ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार को ...

14 Jul 27, 2011
Reply by monika

"दोस्तों ! आज मेरे प्रिय मित्र, छोटे भाई और पूरे ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के चहेते  श्…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 27, 2011 to खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...

3552 Sep 14, 2024
Reply by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी

"अम्बरीश भाई बेहद खुबसूरत ग़ज़ल कही है आपने , शानदार प्रस्तुति पर तालियों के साथ दाद…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"सुंदर प्रयास"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"सिया को भेज वन सीखा अवध ने पाठ यह सच्चा  हर इक आबाद घर में एक वीराना भी होता था..  …"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"तपन भाई , सुंदर ख्यालात है, आदरणीय मुन्नवर राणा जी ने हिंदी शायरों को एक नई राह दिखा…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"योगेन्द्र साहिब बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल कही है आपने, मतला से लेकर मकता तक हरेक शे'र अप…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"बहुत खूब आचार्य जी , प्राकृतिक बिम्ब का इतना सार्थक प्रयोग , मन मुग्ध दिल बाग़ बाग़…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 25, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"मोईन भाई आपकी ग़ज़ल का इन्तजार है, उम्मीद करते है जल्द ही पढ़ने को मिलेगा |"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

"जिन्हें सिक्कों से तौला करते हैं लाखों करोड़ों में  वजूद उनका कभी इक खोटा चार आना भी…"

Er. Ganesh Jee "Bagi" replied Apr 24, 2011 to "OBO लाइव तरही मुशायरा" अंक-१० (Now Closed)

267 Apr 25, 2011
Reply by Er. Ambarish Srivastava

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