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कल्पना रामानी's Discussions (1,279)

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"खुश  नहीं  रह  पाउंगा  उसके  बिना ये मुझे  किस की कमी होने लगी।   कर के वादा वह न आय…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"मन से जब अपना पराया मिट गया जिंदगी फिर से सुखी होने लगी... दिल लगाया धूप से जो रात…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"इस सुंदर गजल के लिए दिल से बधाई आपको आदरणीय अतेन्द्र जी  "

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"मस्जिदों में आशिक़ी होने लगीमंदिरों में मयकशी होने लगी सर बसर  गिरता गया इंसान क्योंप…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"बात झूठी भी खरी होने लगी।  वो कहावत अब सही होने लगी।।...सचमुच खरी बात सुंदर गजल!! ब…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"बहुत शानदार गजल हुई है आदरणीय मौत तुझसे क्या छुपाऊं ! माफ़ कर जिंदगी से आशिक़ी होने ल…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"ज्यों ही मौसम में नमी होने लगी। खुशनुमा यह ज़िंदगी होने लगी।   उपवनों में देखकर ऋतुरा…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"साजिश-ए-बाज़ार है अब चेतिए तितलियों में बतकही होने लगी   मैं मसीहा तो नहीं हूँ जो कहू…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"शानदार गजल के लिए ढेरों बधाइयाँ आदरणीय शिज्जु जी, मन से बधाई आपको"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

"बहुत शानदार गजल कही है आदरणीय, ये शेर विशेष पसंद आए। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये का…"

कल्पना रामानी replied Feb 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-44

992 Feb 27, 2014
Reply by Saurabh Pandey

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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
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२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
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Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
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"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
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दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
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