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"आदरणीय बाग़ी जी सादर प्रणाम,जरूर कई कमियों पर आद. संदीप पटेल जी द्वारा भी अवगत कराया…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 29, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"हार्दिक आभार आदरणीय सतीश मापतपुरी जी. सादर."

Ashok Kumar Raktale replied Jan 29, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"आदरेया सीमा जी सादर, बहुत सुन्दर सुधार किया है आपने,बहुत बहुत शुक्रिया. आपसे मिली दा…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"आदरेया राजेश कुमारी जी सादर बहुत बहुत शुक्रिया अवश्य ही मै सुधार के लिए प्रयत्नशील र…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"ये जीवन के लम्बे तो रस्ते न खलते।अगर हमसफ़र बनके तुम साथ चलते।।............वाह!इसी तर…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"फ़ना  हो  गई  जिंदगी  कब  न  जाने ! कलेंडर  के  पन्ने   बदलते - बदलते !! ** चलें वक़…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"समय देखिये अब उजाले फिसलते हया छटपटाती  यहाँ दिन के ढलते ’न मद है न मत्सर’ कहें जोर…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"छुपा कब तलक मैं रखूं दर्द अपना,झलक जायेगा सब झलकते-झलकते....        बहुत उम्दा सभी अ…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"महज दो पलों के है बादल घनेरे निकल आयेगा दिन निकलते निकलते..............वाह बहुत खूब.…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

"आदरेया राजेश कुमारी जी सादर यह गजल तो पहली गजल पर भारी है एक पे एक ग्यारह. सभी अशार…"

Ashok Kumar Raktale replied Jan 28, 2013 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१ (Now Closed)

561 Jan 29, 2013
Reply by वीनस केसरी

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चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
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