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satish mapatpuri's Discussions (1,788)

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"देख कार्टून वक़्त गुजारे , उसे न जग का भान । बहुत सही कहा आपने ।माँ - बाप द्वारा समुच…"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपकी सराहना के लिए नत हूँ आदरणीय समर साहेब …. नमन ।"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आपकी सराहना से अभिभूत हूँ आदरणीय प्रधान संपादक महोदय …….. नमन ।"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"स्नेहिल टिप्पणी एवम उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया आदरणीय तस्दीक साहेब ।"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"खड़ी की जा रही है नफ़रतों की दीवार अपनॉ के बीच … दिलों में हावी हो रहा है दिमाग का शतर…"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जहाँ अवसर तो रोज पा रहे हैं मगर स्थापित होने से वंचित हो रहे हैं वाह … वाह … शानदार…"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्रदत्त विषय पर बेबाक एवम यथार्थ रचना । सुन्दर सृजन के लिए बधाई आदरणीय ।"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"पूँजी है बरसों की संचित मानव फिर भी सुख से वंचित सुन्दर एवम सार्थक कहन । प्रदत्त विष…"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"सुखी बाबू ! सोचो जरा , कितने काले धन संचित हैं । पर तेरे बीच के बहुत लोग , थोड़े सुख…"

satish mapatpuri replied Apr 15, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्रदत्त विषय पर सुन्दर एवम सामयिक प्रस्तुति के लिए कोटिशः बधाई आदरणीय अखिलेश जी ।"

satish mapatpuri replied Apr 14, 2017 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78

453 Apr 16, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

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