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rajesh kumari's Discussions (9,804)

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"आद० माला झा जी , ,आपको लघु कथा पसंद आई  मेरा लिखना सफल हुआ दिल से बहुत बहुत आभार"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्रिय कल्पना जी , ,आपको लघु कथा पसंद आई इसकी शैली इसका अलग कथानक पसंद आया मेरा लिखना…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"प्रिय सीमा सिंह जी ,आपको लघु कथा पसंद आई इसकी शैली पसंद आई मेरा लिखना सफल हुआ दिल से…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"जी आदरणीय, लघु कथा में विरोधाभास नजर आ रहा  है ."

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"संस्कार के किले को ढहता देख एक मजबूर पिता के दर्द को बहुत अच्छे से उभारा है लघु कथा…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"आज कल खेल सिर्फ खेल की भावना से नहीं पैसा बनाने की भावना से खेला जाता है वो भी स्पेश…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"एक विधवा बहु के लिए एक बीमार वृद्ध मरणासन्न सास का दर्द बखूबी उभर कर आया है लघु कथा…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"नवीन ने पुरातन की जगह ले ली तो पुरातन को दर्द होगा ही गाँव का सुन्दर चित्र खींचा है…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"एतिहासिक् प्रष्ठभूमि पर तैयार की एक शानदार लघु कथा --हम लडाई अंग्रेजों से नहीं हारे…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

"वाह्ह्ह्ह वाह्ह्ह  ढहते हुए किलों को मानों जिन्दगी मिल गई बहुत सुन्दर लघु कथा लिखी ह…"

rajesh kumari replied Jan 31, 2017 to "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-22 (विषय: ढहते क़िले का दर्द)

827 Jan 31, 2017
Reply by मिथिलेश वामनकर

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