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दिगंबर नासवा's Discussions (471)

Discussions Replied To (469) Replies Latest Activity

"खूबसूरत मतले से शुरू हुयी ग़ज़ल आखरी शेर तक अनमोल मोती से शेरों से सजी है गिरिराज जी .…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"आपकी सराहना अहंकार न भर दे वीनस जी .... बहुत बहुत आभार ..."

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"आपका आभार गज़ल को सराहने का .... सहमत हूं बदला जा सकता है .... जहां तक शिला की बात ह…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"बस पांच ही शेरो में कितने अनमोल शेर कह दिए अरुण जी .... किसी एक शेर को लिखना दुसरे क…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"सौरभ जी .... मतले का शेर ही इतना धमाकेदार है की धार बना देता है ग़ज़ल की ... और जिस खू…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"मन्दिर मैं नहीं जाता बच्चों को हँसाता हूँमुझको तो खुदा दिखता मासूम अदाओं में ... कित…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"मत ढूंढ जमाने में, हर शख्स ख़ुदा होगा,   आसान नहीं मिलना, इंसान ख़ुदाओं में ... वाह मि…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"बारूद की खुशबू है दिन रात हवाओं में देता है कोई छुप कर तकरीर सभाओं में   इक याद भटकत…"

दिगंबर नासवा replied Dec 26, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 54

597 Dec 27, 2014
Reply by शिज्जु "शकूर"

"अच्छा प्रयास है लक्ष्मण जी ... अलग तरह की सोच और कुछ कहने की कला ज़रूरी है शिल्प तो स…"

दिगंबर नासवा replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

"अच्छी गजल है छाया जी ... प्रभावी शेर बने हैं ...  बहुत बधाई ..."

दिगंबर नासवा replied Nov 29, 2014 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - 53

415 Nov 29, 2014
Reply by भुवन निस्तेज

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२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
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"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
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