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Sushil Sarna's Discussions (1,416)

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"हे उड्डयन अभिलाषी !एक बार बंधकर तो देखोउस बंधन मेंजिसे कहते है प्यारजहाँ अंतस से झरत…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीय Hari Prakash Dubey jee प्रदत विषय पर बहुत ही सुंदर मनोभावों को समेटे सुंदर शब…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"कैसे छूटूँ इस बन्धन से, ढूँढे सत्य निदान।टूटेगें सब बन्ध एक दिन, कर हरि का गुनगान।।……"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी रचना पर आपकी आत्मीय  प्रशंसा का हार्दिक आभार। "

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी रचना पर आपकी प्रेरक प्रशंसा का हार्दिक आभार। "

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आ.Satyanarayan Singh जी आपकी इस स्नेहिल अभिव्यक्ति का तहे दिल से शुक्रिया।"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"बंधन … हर रिश्ता इक बंधन है अब रिश्तों में क्रंदन है शीश नवाते प्रभु के आगे माथे पर…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीया वंदना जी गज़ब की भावाभिव्यक्ति है   .... मन्त्र मुग्ध हूँ आपकी रचनाओं खासकर द…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी बैसाखी वे नहीं ढूंढते,क्रंदन उनको नहीं सुहाता ....…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

"आदरणीय  khursheed khairadi   जी बाँध सके ना परछाई को मेरीशर्मसार है फिर बेचारे बंधन…"

Sushil Sarna replied Nov 15, 2014 to "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 49

463 Nov 15, 2014
Reply by वेदिका

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आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
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आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Feb 5
Sushil Sarna posted a blog post

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दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
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Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
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Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

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