For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१

2122 1122 1122 22/ 112

बज़्मे अग्यार में नासूरे नज़र होने तक
क्यों रुलाता है मुझे दीदा-ए-तर होने तक //१

कितने मुत्ज़ाद हैं आमाल उसके कौलों से
टुकड़े करता है मेरा लख़्ते जिगर होने तक //२

गिर के आमाल की मिट्टी में ये जाना मैंने
तुख़्म को रोज़ ही मरना है शज़र होने तक //३

मौत का ज़ीस्त में मतलब है अबस हो जाना
ज़िंदा हूँ हालते बेजा में गुज़र होने तक //४

बूदे आफ़ाक़ी का दरमाँ नहीं है दुनिया में
जीना पड़ता है फ़रिश्तों की नज़र होने तक //५

क़ब्ल मिलने से तेरे कब था सुकूं जीने में
रहगुज़ारों में भटकते रहे घर होने तक //६

उसने शाइस्तगी से क़त्ल मेरा कर डाला
ज़िंदा रक्खा है किसे उसने ख़बर होने तक //७

दुख में फ़ौरन ही दवा काम नहीं करती है
दर्द को झेलना पड़ता है असर होने तक //८

ख़्वाबबीदा है अगरचे ये ज़माना शब में
रात ख़ुद जागती है वक़्ते सहर होने तक //९

इश्क़ उसका है फ़ुसूं 'राज़' ख़यालों में मेरे

रेग का सीप में तब्दीले गुहर होने तक  //१०

~राज़ नवादवी

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

बज़्मे अग्यार- ग़ैर लोगों की महफ़िल; मुत्ज़ाद- परस्पर विरोधी, विपरीत; आमाल- कर्म; कॉल- कथन; लख्ते जिगर- जिगर का टुकड़ा, प्यारा होना; तुख्म- बीज; शज़र- पौधा, पेड़; अबस- निष्फल, व्यर्थ; बूदे आफ़ाकी- सांसारिक अस्तित्व; दरमाँ- इलाज; ख़्वाबबीदा- ख़्वाब में डूबा; सदफ़- सीप; तख़लीक़े गुहर- मोती की रचना




Views: 134

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by राज़ नवादवी on December 15, 2018 at 10:36am

जी जनाब, बहुत बहुत शुक्रिया. सादर 

Comment by Samar kabeer on December 15, 2018 at 9:51am

ठीक है ।

Comment by राज़ नवादवी on December 15, 2018 at 12:58am

आदरणीय समर साहब, आदाब. 

क्या मक़ते 

इश्क़ उसका है फ़ुसूं 'राज़' ख़यालों में मेरे 
सदफ़े नाचीज़ में तख़लीक़े गुहर होने तक //१० 

को यूँ करना उचित होगा? 

इश्क़ उसका है फ़ुसूं 'राज़' ख़यालों में मेरे 

रेग का सीप में तब्दीले गुहर होने तक 

सादर 

Comment by राज़ नवादवी on December 15, 2018 at 12:39am

जी जनाब, बहुत बहुत शुक्रिया. सादर. 

Comment by Samar kabeer on December 14, 2018 at 10:53pm

मज़कूरा लुग़त क़ाबिल-ए-ऐतिबार नहीं ।

Comment by राज़ नवादवी on December 14, 2018 at 12:31pm

जी जनाब, मैं समझ गया, बहुत बहुत शुक्रिया. मिसरे को बदलता हूँ. मगर, लुगत में दिए उन तीन शब्दों को जिनका मैंने ज़िक्र किया है, क्या जैसे वो दिए गए हैं, वैसे इस्तेमाल किया जा सकता है? सादर 

Comment by Samar kabeer on December 14, 2018 at 11:11am

भाई, चूँकि "सदफ़" शब्द अरबी भाषा का है,और अरबी भाषा के शब्दों में अमूमन इज़फ़त नहीं लगाई जाती,और 'सदफ़' का वज़्न भी 12 है न कि 'सद्फ'21,जैसे मिसाल के तौर पर शब्द है "अमल" अब इसमें इज़फ़त लगाने पर इसे 'अमले' तो नहीं पढ़ेंगे,इसे यूँ लिखा और पढ़ा जाएगा "अमल-ए-"उम्मीद है आप समझ गए होंगे?

Comment by राज़ नवादवी on December 14, 2018 at 3:14am

आदरणीय समर कबीर साहब, आदाब. एक बात वाज़ेह करनी थी, जनाब मद्दाह साहब एवं जनाब उस्मानी साहब के लुगत में मैंने ये अलफ़ाज़ पाए हैं: 

१) सदफ़े पेचाक صدف پیچاک  - अ.फ़ा.पु.- घोंघा  

२) सदफ़े मर्वारीद صدف مروارید  - अ.फ़ा.स्त्री.- वह सीपी या सीप जिससे मोती निकलता है 

३) सदफ़े सादिक़ صدف صادق  - अ.स्त्री.- सच्ची सीपी, वह सीपी जिसमें मोती होता है 

देवनागरी में इन तीनों उदाहरणों में सदफ़ को अगले लफ्ज़ से जोड़ने के लिए "सदफ़े" लफ्ज़ लिखा गया है, सदफ़-ए- नहीं. उर्दू में जैसे लिखा है, वैसे मैंने उन्हें यहाँ टाइप कर दिया है. कृपया मेरी शंका दूर करें. सादर 

Comment by राज़ नवादवी on December 13, 2018 at 11:04pm

आदरणीय समर कबीर साहब, ग़ज़ल में आपकी शिरकत और इस्लाह का बहुत बहुत शुक्रिया. आपने जैसा फ़रमाया, उस मुताबिक़ तरमीम करके ग़ज़ल दुबारा पोस्ट करता हूँ. मुझे भी यही मालूम था कि दरमाँ पुल्लिंग है, मगर जनाब मुहम्मद सज्जाद उस्मानी साहब के लुगत में स्त्रीलिंग बताए जाने से मैं कंफ्यूज हो गया. मक़ते को भी दुरुस्त करने की कोशिश करता हूँ. सादर. 

Comment by Samar kabeer on December 13, 2018 at 10:57pm

एक बात बताना भूल गया ।

दुख में फ़ौरन भी दवा काम नहीं करती है'

इस मिसरे में 'भी' शब्द की जगह "ही" करना उचित होगा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

ग़लतफ़हमी-लघुकथा

"याद पिया की आए" ठुमरी लैपटॉप में मद्दम स्वर में बज रही थी, बाहर बरसती हुई बूंदों का शोर मन में…See More
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

शृंगारिक दोहे :

शृंगारिक दोहे : नैनों से बरखा बहे, जब से छूटा हाथ। नींदें दुश्मन हो गईं, कब आओगे नाथ।1।एक श्वास…See More
8 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी।"
11 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा
"जनाब भाई सुरेंद्र नाथ साहिब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत…"
11 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। एक से बढ़कर एक बेहतरीन दोहे लिखे आपने। इन दोहों के लिए बधाई…"
11 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल _किसी से प्यार किसी से क़रार ख़ैर ख़ुदा
"आद0 तस्दीक अहमद खान साहब सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने। वाह वाह वाह। बहुत बहुत बधाई…"
11 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post बौना आदमी - लघुकथा -
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया और संदेशपरक लघुकथा लिखी आपने। इस लघुकथा पर ढेरों बधाई आपको।"
11 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Anamika singh Ana's blog post गीत
"आद0 अनामिका सिंह जी सादर अभिवादन। बढ़िया लय युक्त गीत प्रस्तुत किये आपने। बधाई स्वीकार कीजिये इस…"
11 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani added a discussion to the group बाल साहित्य
Thumbnail

कित्ती कैसे सुख-शांति (बाल-कविता)

तोल मोल के बोल रानीकित्तन- कित्तन है पानी।ढोल पीट के बोल  जूलीहै कित्ती-कित्ती हरियाली।मोल-अनमोल…See More
13 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" posted a blog post

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना------गीत

प्रेम हो जाना अर्थात रात भर जगना।।भूख प्यास नींद चैन सब गँवा करअवधान में एकल उद्दीपक बसा करउस तक…See More
15 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

अथ अभिकल्पित-आचार-संहिता (आलेख)

बच्चों को शुरू से अध्यात्म, आराधना,  वंदना आदि का व्यावहारिक अभ्यास 'लर्न विद़ फ़न, लर्न विद़ कर्म'…See More
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gajendra shrotriya's blog post इक ही दिन काफ़ी नही है - ग़ज़ल
"आ. भाई गजेंद्र जी, माँ को समर्पित सुंदर गजल के लिए हार्दिक बधाई।"
20 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service