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जरुरत ( लघुकथा)

". सबेरे- सबेरे सामान लेकर कहॉ जा रहे हैं , श्याम बाबू |"

" भाई , भारत दर्शन को जा रहा हूँ "|

इसमे तो बहुत समय लगेगा , फिर परिवार का ?

परिवार मे अब शक्ति के छोटे- छोटे केन्द्र बन गये हैं | हमारी जरुरत नही है |

सत्यजीत राय

भोपाल
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 556

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Comment by Archana Tripathi on July 27, 2015 at 1:20am
घर के सर्वेसर्वा के अचानक अर्थहीन होने की टीस को दर्शाती उत्कृष्ट लघुकथा ।हार्दिक बधाई आपको satyajeet Roy jiv
Comment by Satyajit Roy on July 26, 2015 at 9:49pm
शुक्रिया आदरणीय Prashant Priyadarshiji
Comment by Prashant Priyadarshi on July 26, 2015 at 9:30pm

आदरणीय सत्यजीत राय सर, मात्र 4 पंक्तियों में आपने वर्तमान में घर-घर की व्यथा को दर्शा दिया है, बहुत बढ़िया लघुकथा है.

Comment by Satyajit Roy on July 26, 2015 at 9:25am
आदरणीय ओम प्रकाश क्षत्रिय जी उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया
Comment by Satyajit Roy on July 26, 2015 at 9:20am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार
Comment by Omprakash Kshatriya on July 26, 2015 at 8:07am
आदरणीय सत्यजीत राय जी
प्रणाम ।
आप ने बहुत ही सुन्दर लघुकथा लिखी है । बधाई ।

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