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गजल---दिल है जो तेरा आशिक उसकी खता नहीं है ।।

२२१ २१२२ २२१ २१२२

हूँ जो नशे में धुत मैं मय का नशा नहीं है।
यह इब्तिदा-ए-उल्फत है इन्तिहा नहीं है ।।

किस ओर जाके खोले बोतल शराब की ये।
उनकी गली से अब तक हम आशना नहीं है ।।

ऐसा करूं मैं क्या जो तू खुद गले लगा ले।
तू ही बता दे मुझको, मुझको पता नहीं है ।।

है मय ये तेरी आँखें सावन है तेरी जुल्फे।
दिल है जो तेरा आशिक उसकी खता नहीं है ।।

हर रोज सोचता हूँ कह दूँ मैं आज उनसे।
अब प्यार तो बहुत है पर हौसला नहीं है ।।

ताउम्र काट दे जो इक नाम के सहारे।
अब आशिको में 'राहुल' ऐसी वफा नहीं है ।।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Rahul Dangi Panchal on July 11, 2015 at 9:16pm
आदरणीय Saurabh Pandey जी माफ कर दिजिए आगे से इस तरह के शब्द का प्रयोग नहीं करुंगा। सादर नमन।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 10, 2015 at 11:45am

भाई राहुलजी, शिष्टाचार के अंतर्गत भले ही स्वयं को असहाय, अशक्त की तरह प्रस्तुत किया जाता है. परन्तु किसी सूरत में स्वयं को ’मंदबुद्धि’ या ’कम बुद्धि’ कहना उचित हीं. ’कम बुद्धि’ या ’मंदबुद्धि’ कभी सारस्वत कर्म हेतु उद्यत नहीं होते. आगे आप अपनी रचनाओं पर ध्यान दें. हार्दिक शुभेच्छाएँ.

Comment by Rahul Dangi Panchal on July 6, 2015 at 6:58am
आदरणीय Saurabh Pandey जी यह इस मंच की ही देन है। और आप जैसे उदार गुनीजनों की कि हम कम बुद्धि भी कुछ कुछ पटरी पर आ रहे है । आपका बहुत बहुत आभार।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 6, 2015 at 2:31am

भाई राहुल जी, आप बाबहर ग़ज़ल कहने लगे यह बहुत बड़ी उछाल है. शुभकामनाएँ
धीरे-धीरे आपकी लगन रंग ला रही है..

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 28, 2015 at 7:39am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आपकी टिप्पणी का बडी बेसबरी से इन्तजार रहता है। किआप कोई कमी बताए और मैं नौसिखिया कुछ सीखूं क्रपया मेरी त्रुटी अवश्य बताया करो। सादर धन्यवाद

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 2:49am

बहुत दिनों बाद आपकी ग़ज़ल से रु ब रु हो रहा हूँ 

शानदार ग़ज़ल हुई है, दाद कुबूल फरमाए 

Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 7:28pm
आदरणीय maharshi tripathi जी सादर धन्यवाद
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 7:27pm
आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी बहुत बहुत धन्यवाद
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 7:26pm
आदरणीयSamar kabeer साहब जी शुक्रिया मैं कोशिश करता हुँ आपके सुझाव हेतु एक बार पुन: धन्यवाद
Comment by Rahul Dangi Panchal on June 18, 2015 at 7:25pm
आदरणीय वीनस भाई जी बहुत बहुत शुक्रिया मैं आपके सुझाव के अनुसार सुधारने की कोशिश करता हुं सादर

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