For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल- मुझे शायरी में पुकार दे!

११२ १२ ११२ १२

तु गजल में थोडा खुमार दे!
तु जरा सा और सँवार दे!!

तेरे लफ्ज तेरी जमीन है!
इन्हें आँसुओं से निखार दे!!

उसे भूल जा है जो बेवफा!
ये लिबास गम का उतार दे!!

यूं घुमा फिरा के न बात कर!
मुझे साफ साफ नकार दे!!

मैं बिगड गया मुझे डाँट माँ!
मेरी जिन्दगी को सुधार दे!!

या खुदा तु कह दे घटाओं से!
मेरे खेत को भी दुलार दे!!

कि मैं दफ्न हूँ मेरे शे'र में!
मुझे शायरी में पुकार दे!!


मौलिक व अप्रकाशित!

Views: 1598

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by khursheed khairadi on January 15, 2015 at 11:54am

आदरणीय राहुल जी यह आपकी विनम्रता है वरना यहाँ तो लोग इस्लाह पर भड़क जाते हैं , और अपना किताबी ज्ञान झाड़कर इस्लाह करने वाले को ही कमतर साबित करने की कोशिश करने लगते है |सादर नमन आपकी लगन को |शुरुआत हर शायर तुकबंदी से ही करता है |

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 15, 2015 at 11:38am

आदरणीय khursheed khairadi जी मैं मुझे इस मंच पर आने से पहले ये भी नहीं पता था कि गजल मात्रा व बहर मे होती है मैं इन नामो से परिचित तक नही था केवल तुकबन्धी करता था ये सब आप जैसे आदरणीयों की ही मेहरबानी है जो मुझमे चुट मुट सुधार हुआ है ! मैं आप सब में सबसे छोटा हुँ तो इस लिए मुझे आप सबके आशिर्वाद की जर्रत है ! सादर नमन!

Comment by khursheed khairadi on January 15, 2015 at 11:24am

तेरे लफ्ज तेरी जमीन है!
इन्हें आँसुओं से निखार दे!!

यूं घुमा फिरा के न बात कर!
मुझे साफ साफ नकार दे!!

आदरणीय राहुल साहब ,  ग़ज़ल के सभी अशहार के मूल भावों को और अधिक निखर कर आपने जो बा-बहर ग़ज़ल प्रस्तुत की है उसका एक एक शेर झूमने को मज़बूर करता है |ग़ज़ल आपकी मेहनत का नतीजा है | आदरणीय गिरिराज जी और मैंने तो केवल कुछ शंकाओं का निवारण भर किया था |अदब में एक ही विधा पर होने से आपस में बंधुत्व होने के नाते अपना फ़र्ज़ निभाने का प्रयास भर किया है |सादर 

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 15, 2015 at 9:19am
आदरणीय गिरीराज जी आपके व आदरणीय खुर्शीद जी के आशिर्वाद से ही मैं कुछ सुधार कर पाया! मैं आपका बहुत आभारी हुँ! सादर
Comment by Rahul Dangi Panchal on January 15, 2015 at 9:17am
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी बहुत बहुत धन्यवाद! मैं आपके सुझाव पर अवश्य गौर करुंगा सादर!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 15, 2015 at 8:38am

आदरणीय राहुल भाई , आपकी लगन और मेहनत दोनों सलाम ।

ग़ज़ल सुधर के बहुत सुन्दर हो गई है , आपको दिली बधाइयाँ और शुभकामनायें ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 15, 2015 at 8:29am
कि मैं दफ़्न हूँ हर लफ्ज़ में
मुझे शायरी में पुकार दे।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 15, 2015 at 8:27am
आखिरी अशआर में मेरे शेर में के स्थान पर लफ्ज़ या और कुछ कर लीजिये क्योकि शेर और शायरी का अर्थ तो एक ही है।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 15, 2015 at 8:24am
वाह वाह वाह राहुल भाई गुणीजनों के मार्गदर्शन के बाद क्या ग़ज़ल निकल आई। बहुत ही बेहतरीन। एक एक अशआर कमाल का। दिल से दाद कुबूल कीजिये। ये आपकी बेहतरीन ग़ज़लों में से एक होगी। आंनद आ गया पढ़कर। कमाल हो गया है आपकी कलम से। क्या कहन है। शेर दर शेर झूम रहा हूँ बस पढ़कर।
Comment by Rahul Dangi Panchal on January 15, 2015 at 8:19am
आदरणीय गिरीराज जी और आदरणीय khursheed khairadi जी मैनें गजल में कुछ सुधार का प्रयत्न किया है क्रपया जरा एक फिर मेरा मार्ग दर्शन करने का कष्ट करें! सादर विनती!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"अमराई में उत्सव छाया,कोयल को न्यौता भिजवाया। मौसम बदले कपड़े -लत्ते, लगे झूमने पत्ते-…"
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"ठण्ड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं बौराने। पंछी गाते सुर में…"
Tuesday
pratibha pande replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"लघुकथा किसी विसंगति से उभरती है और अपने पीछे पाठको के पीछे एक प्रश्न छोड़ जाती है। सबकुछ खुलकर…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service