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"मैं अपने ही साथ रहूँगा"

मैं अपने ही साथ रहूँगा!
खुद में तुझसे बात करूँगा!!

अब चाहे  जिससे मिलना हो!
दर्पण अपने साथ रखूँगा!!

मेरे कद को ढाँक सके जो !
ऐसी चादर साथ रखूँगा!!

उनको हँसकर मिलने तो दो!
मैं भी दिल की बात करूँगा!!

बातें बहुत ज़बानी कर लीं!
मैं भी खत इक बार लिखूँगा!!
*****************************

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 470

Comment

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Comment by ram shiromani pathak on August 11, 2014 at 12:41pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई नीरज जी। । सादर

Comment by Neeraj Nishchal on August 11, 2014 at 12:39pm

अब चाहे  जिससे मिलना हो!
दर्पण अपने साथ रखूँगा!!

वाह बहुत ही गहरे भाव बहुत ही सुन्दर रचना बहुत बहुत बधाई प्रेषित है
आदरणीय पाठक जी ।

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