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दो घनाक्षरी --- प्यारी गुड़िया के लिए

[1] 

रूप मनभावन है मंद मंद मुस्कराये

नन्हें नन्हें पाँव लिए दौड़ी चली आती है

बार बार सहलाती अपने कपोल वह

छोटी छोटी गोल गोल आँखें मटकाती है

अम्मा पहना के जब पायल संवारती हैं

दौड़ती तो झनक झनक झंझनाती है

कायल है दादा दादी नाना नानी सभी अब

ठुमक ठुमक कर खूब इतराती है ॥ 

[2] 

दादी अम्मा भोजन कराएं तो सताती वह

आगे आगे भागे पीछे अम्मा को छकाती है

कापी छीन लेती लेखनी वो तोड़ देती भाई

को है वो सताती और पापा को पकाती है

दीदी को तो अपनी सहेली मान बतियाती

ठुमक ठुमक दिन रात वो नचाती है

आंचल पकड़ माँ को खूब दुलराती नित्य

रच के कहानियाँ नई नई सुनाती है ॥

अन्नपूर्णा बाजपेई 

अप्रकाशित मौलिक 

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Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 23, 2014 at 9:27am

बहुत सुंदर भाव से संजोयी प्रस्तुति, बधाई आदरणीया अन्नपूर्णा दीदी

Comment by Neeraj Neer on April 23, 2014 at 9:05am

बहुत सुन्दर.

Comment by annapurna bajpai on April 22, 2014 at 6:26pm

आपका हार्दिक आभार आ0 लक्ष्मण जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 22, 2014 at 10:59am

आदरणीय  अनुपमा  बहन , बिटिया  के  बालरूप  का  क्या  मोहक  चित्र  खिंचा  हैi , बहुत  बहुत  हार्दिक  बधाई .

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