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देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

कैसा है तुमसे रिश्‍ता हमको नही पता

पर बात अपने दिल की मैं तुमको दूँ बता

जैसे है तेरे साथ रिश्‍ता मेरा अहम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

देखा था मैनें सपना एक रात क्‍या कहूँ

आँखो से छलकते अश्‍कों के साथ मैं बहूँ

ये बात मेरी ऐसी नहीं हो तुझे हजम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

आ कर तुम बैठो मेरे पास मेरे यार

रहूँ देखता मैं तुझको करता रहूँ प्‍यार

करते है तुमसे प्‍यार या है मेरा वहम

आँखो मे मेरे बस गइ खा के कहूँ कसम

देखा है जब से तेरी तस्‍वीर को सनम

मौलिक एवं अप्रकाशित अखंड गहमरी

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Comment by Meena Pathak on March 4, 2014 at 7:40pm
Bahut sundar waham aap kaa ... Badhai
Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 4, 2014 at 6:05pm

जी उर्दू में ऐसा कर सकते हैं..

Comment by Sarita Bhatia on March 4, 2014 at 5:42pm

खुबसूरत 

गई को गइ लिख सकते हैं क्या ?

Comment by मनोज कुमार सिंह 'मयंक' on March 4, 2014 at 5:23pm

सुन्दर..उम्दा..बेहतरीन 

कृपया ध्यान दे...

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