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प्रेम तृणों से .

प्रेम तृणों से  …….

पलक पंखुड़ी में प्रणय अंजन से 
सुरभित संसृति का श्रृंगार करो 
भ्रमर गुंजन के मधुर काल में 
कुंतल पुष्प श्रृंगार करो 
तृप्त करो तुम नयन तृषा को 
मिलन क्षणों को स्वीकार करो 
अपने उर में अपने प्रिय की 
अनुपम सुधि से श्रृंगार करो 
विस्मृत कर प्रतिकार सभी तुम 
श्वासों में प्रेम श्रृंगार करो 
चिर सुख के प्यासे अधरों पर 
तृप्ति वृष्टि का संचार करो 
अभिलाषाओं की बस्ती में तुम 
प्रेम तृणों से श्रृंगार करो, 
प्रेम तृणों से श्रृंगार करो ……..

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by annapurna bajpai on December 23, 2013 at 7:45pm

बेहद सुंदर रचना हेतु बहुत बधाई स्वीकारें आ0 सुशील शर्मा जी । 

Comment by Sushil Sarna on December 23, 2013 at 7:39pm

aa.Arun Sharma Anant jee aapkee snehil pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Saarthi Baidyanath on December 23, 2013 at 6:42pm

भ्रमर गुंजन के मधुर काल में 
कुंतल पुष्प श्रृंगार करो ...अहा ! क्या कहने , बहुत ही मधुर रचना ! सादर :)

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 23, 2013 at 1:52pm

आदरणीय सुशील सर बेहद सुन्दर रचना हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by Sushil Sarna on December 23, 2013 at 12:40pm

aadrneeya Meena Pathak jee rachna par aapkee snehil prashansa ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 23, 2013 at 12:39pm

aa.Avinash S Bagde jee rachna par aapkee snehil pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 23, 2013 at 12:38pm

aa.Dr.Gopal Narain Shrivastav jee rachna par aapkee snehaasheesh ka haardik aabhaar

Comment by Sushil Sarna on December 23, 2013 at 12:38pm

aadrneey Giriraj Bhandaaree jee rachna par aapkee aatmeey pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Meena Pathak on December 23, 2013 at 12:34pm

सुन्दर रचना हेतु सादर बधाई 

Comment by AVINASH S BAGDE on December 23, 2013 at 11:53am

चिर सुख के प्यासे अधरों पर 
तृप्ति वृष्टि का संचार करो 

सुन्दर श्रृंगार रचना सुशील भाई 

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