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ग़ज़ल
वजन : 2212 2212

 

बकवास सारा आ गया,
खबरों में रहना आ गया ।1। 
 

जो धड़कनें पढ़ने लगे, 
तो शेर कहना आ गया ।2।

 

जब सिर बँधी पगड़ी मेरे,
तब ही से सहना आ गया ।3।

 

जब से सियासत सीख ली,
कह के मुकरना आ गया ।4।

 

दो बेटियों का बाप हूँ,
मुझको भी डरना आ गया ।5।

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट => लघुकथा : डर

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 2, 2014 at 4:55pm

 टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार प्रिय आशीष नैथानी जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on February 2, 2014 at 4:54pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय डॉ अनिल मिश्रा जी, आपकी उत्साहवर्धन करती टिप्पणी पुरस्कार सदृश है, ओ बी ओ मंच आप सभी का मंच है बहुत बहुत स्वागत और अभिनन्दन है पुनः धन्यवाद प्रेषित है। 

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on September 25, 2013 at 7:57pm

जब से सियासत सीख ली,
कह के मुकरना आ गया ।|

वाह वाह,  बहुत खूब  !!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:35am

आपकी बहुमूल्य टिप्पणी हेतु आभार आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपेई जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:32am

आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी और प्रिय पीयूष भाई, सराहना हेतु आप दोनो का आभार |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:29am

आदरणीय डाक्टर आशुतोष मिश्रा जी, ग़ज़ल पसंद करने के लिए आभार, अंतिम शेर मुझे भी अधिक पसंद है |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:28am

धन्यवाद आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:23am

आपकी सराहना सर माथे पर आदरणीया प्रवीना मल्लिक जी |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:23am

सराहना और प्रोत्साहन हेतु आभार आदरणीया सरिता बहन |


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 19, 2013 at 8:22am

बहुत बहुत आभार भाई जितेंद्र जी |

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