For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जो ख़्वाबों में बसा लूँ तो .......(गज़ल) //डॉ० प्राची

१२२२...१२२२ 

नज़र दर पर झुका लूँ तो 

मुहब्बत आज़मा लूँ तो 

तेरी नज़रों में चाहत का 

समन्दर मैं भी पा लूँ तो 

बदल डालूँ मुकद्दर भी 

अगर खतरा उठा लूँ तो 

सियह आरेख हाथों का 

तेरे रंग में छुपा लूँ तो 

तेरी गुम सी हर इक आहट 

जो ख़्वाबों में बसा लूँ तो 

तुम्हारे संग जी लूँ मैं  

अगर कुछ पल चुरा लूँ तो 

न कर मद्धम सी भी हलचल 

मैं साँसों को सम्हालूँ तो 

तुम्हें ये राज क्या कहना 

इसे दिल में छुपा लूँ तो 

मौलिक और अप्रकाशित 

Views: 1734

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 13, 2013 at 1:30pm

 आ. प्राचीजी , बधाई । " तो " की जगह " मैं " रखकर और कुछ शब्द बदलकर  देखा तो गजल और अच्छी लगी। 

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 11:36am

आदरणीया प्राची जी, छोटी बहर में बहुत ही सुन्दर गज़ल। आपका हार्दिक बधाई!
मेरी समझ से यदि एक ही तरह की भाषा का रचना में प्रयोग किया जाए तो अच्छा रहता है। उर्दू के शब्दों के साथ आरेख जैसे शुद्ध हिन्दी के शब्दों का प्रयोग रचना के गठन को बिगाड़ता ही है।
यह मेरी अपनी सोच भर है।
सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 13, 2013 at 11:18am

आदरणीया प्राची जी , बहुत प्यारी गज़ल कही है , हर शेर प्यारे है !! हार्दिक बधाई !!

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 13, 2013 at 11:10am

नज़र दर पर झुका लूँ तो 

तुझे अपना बना लूँ तो ... बेहतरीन मतला

तेरी नज़रों में चाहत का 

समन्दर मैं भी पा लूँ तो ... वाह वाह

बदल डालूँ मुकद्दर भी 

जो ये खतरा उठा लूँ तो .. आय हाय

सियाह आरेख हाथों का 

तेरे रँग में छुपा लूँ तो ... लाजवाब लाजवाब

तेरी गुम सी भी हर आहट 

जो ख़्वाबों में बसा लूँ तो ... जबरदस्त

तुम्हारे संग जीना है 

जो कुछ लम्हें चुरा लूँ तो .. वाह वाह

न कर मद्धम सी भी हलचल 

मैं साँसों को सम्हालूँ तो ... अहा! अहा! अहा! हृदयस्पर्शी

तुम्हें ये राज क्या कहना 

इसे दिल में छुपा लूँ तो... लाजवाब

वाह दीदी वाह छोटी बहर का क्या खूबसूरत जादू चलाया है आपने मजा आ गया. दिल से ढेरों दाद कुबूल फरमाएं. कई बार पढ़ गया और मजा हर बार बढ़कर ही मिला.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 13, 2013 at 10:57am

//नज़र दर पर झुका लूँ तो 
तुझे अपना बना लूँ तो 
तेरी नज़रों में चाहत का 
समन्दर मैं भी पा लूँ तो// बहुत खूबसूरत अशआर हैं वाह

//सियाह आरेख हाथों का 
तेरे रँग में छुपा लूँ तो// इस शेर की तक्तीअ एक बार फिर करके देखें 

//तेरी गुम सी भी हर आहट 
जो ख़्वाबों में बसा लूँ तो // 

आदरणीया डॉ प्राची आपके इस खूबसूरत शेर के साथ छेड़छाड़ की गुस्ताखी कर रहा हूँ,

तेरी गुम सी हर आहट भी 
जो ख़्वाबों में बसा लूँ तो


//तुम्हारे संग जीना है 
जो कुछ लम्हें चुरा लूँ तो// बेहद मासूमियत भरा आग्रह है वाह

//न कर मद्धम सी भी हलचल 
मैं साँसों को सम्हालूँ तो 
तुम्हें ये राज क्या कहना 
इसे दिल में छुपा लूँ तो//

आदरणीया डॉ प्राची आपकी इस ग़ज़ल के हर शेर से यूँ लगता है जैसे कोई मद्धम संगीत सुनाई दे रहा हो, अपनी इस खूबसूरत रचना के लिये दाद कुबूल फरमायें 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Thursday
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service