For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिये की लौ ( लघु कथा )

कृति मौलिक न होने के कारण प्रबंधन स्तर से हटा दी गई है | 

एडमिन 

2013083107 

Views: 943

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on August 29, 2013 at 8:42pm

आदरणीय नीरज जी जो आपत्ति आदरणीया गीतिका जी ने उठायी है उसके संबंध में आपको यह स्पष्टीकरण तो देना ही चाहिए कि यह कहानी क्या वास्तव में आपकी सोच का परिणाम है या फिर आपने कहीं से पढ़कर इसे अपने शब्द दे दिए। रामायण या महाभारत का आधार लेकर विषयांतर नहीं किया जाना चाहिए।
सादर!

Comment by Neeraj Nishchal on August 29, 2013 at 8:39pm

आदरणीया गीतिका जी हम इस अस्तित्व में कुछ नया पदार्थ नही पैदा कर सकते और ना ही हम कोई नया विचार पैदा कर सकते हैं क्या कभी कोई कहानी पढ़कर आपको ऐसा नही लगता ऐसा मुझे भी समाज में देखने और सुनने को मिला है , और वैसा अगर आपको देखने और सुन ने को ना मिला हो तो आप शायद उसको समझ ही नही पाती , हमने भी उसे देखा हमने भी उसे समझा पर लेखक ने उसे अपने शब्द दिए हैं लेखक के पास शब्द देने की ही कला है बाकी देख सुन और समझ तो शायद सब रहे हैं , सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है क्या कहानियाँ मौलिक हो सकती हैं क्या कोई ऐसी कहानी हो सकती है जो हमारे कभी देखने सुनने में ना आई हो अगर ऐसा हो जाए तो जान ना आपने काहानियाँ कुछ कम पढ़ी हैं और समाज को पूरे तरीके से देखने में आप सक्षम नही हैं , क्यों की लेखक कुछ समाज से बाहर तो नही सोच लेगा और अगर वो ऐसा कर भी ले तो आपके समझ में नही आएगी ,गीता के कितने संस्करण मै पढ़ गया सभी मौलिक थे , पर उसमे किसी ने कोई नयी बात नही कह दी सब बात को अपने अपने ढंग में कह रहे हैं , लेखक जो कह रहा है आप भी उसे जानते हैं और आप उसे आसानी से समझ लेते हैं मौलिक है तो लेखक के लिखने का अंदाज । सुभद्रा कुमारी जी के बाद अगर मै भी झांसी की रानी पर कविता लिखूं तो सबकुछ वैसा ही घटेगा मै भी वही बातें लिखूंगा जो उन्होंने लिखी जैसा उनकी कहानी में घटा है पर जो मौलिक चीज होगी वो मेरी शब्दों की सजावट मेरी तुकबंदी मेरा ढंग , हम अपनी दीवार को नया करने के लिए नयी दीवार तो नही बनाते हैं ना उस पर नया रंग ही चढ़ा सकते हैं । सादर

Comment by वेदिका on August 29, 2013 at 6:26pm

आपकी बात भी सही है, और मेरी जानकारी भी| सिर्फ कुछ शब्दों के हेरफेर से वस्तु मौलिक तो नही हो जाती| वही बच्चा, वही दिया, वही युवक, वही दिया का जलना और उसका फूंक मार के बुझा के युवक को आत्म ज्ञान देना| कथा के मर्म को अपनी भाषा में लिखने से यदि उसे मौलिक कहा जाये तो मुझे ज्ञात नही था आदरणीय नीरज जी !! मुझे जो नीतिगत लगा सो बताया, आगे जिम्मेदारी मंच की है ..... सादर !! 

Comment by Neeraj Nishchal on August 29, 2013 at 5:42pm

दुनिया में जीतनी रामायण हैं सभी मौलिक हैं
ऐसा तो मानती हैं आप

Comment by Neeraj Nishchal on August 29, 2013 at 5:39pm

आदरणीया गीतिका जी किसी बड़े लेखक ने कहा है विचार और दृष्टांत कभी मौलिक नही होते,
कोई भी लेखक कुछ नया नही लिख रहा है बस वो किसी घटना या किसी
दृष्टांत को अपने शब्द ही दे रहा है और लेखक किसी घटना या दृष्टांत को
अपने शब्द देता है वो मौलिक है , लेखक कुछ भी लिखता है कहीं से प्रेरणा पाकर ही लिखता है ,
कोई बच्चा जन्म लेकर तुरंत ही तो लेखक नही हो जाता ।

Comment by वेदिका on August 29, 2013 at 5:21pm

यह दृष्टांत मैंने बचपन में एक धार्मिक पत्रिका अखंड ज्योति में पढ़ा है| और कुछ वर्ष पहले ओशो वर्ल्ड में भी, फिर यह मौलिक और अप्रकाशित कैसे हुआ !!  

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

रामबली गुप्ता posted a blog post

कर्मवीर

आधार छंद-मनहरण घनाक्षरी सुख हो या दुख चाहें रहते सहज और, जग की कठिनता से जो न घबराते हैं। स्थिति…See More
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर और समसामयिक नवगीत रचा है आपने। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

दोहा पंचक - आचरण

चाहे पद से हो बहुत, मनुज शक्ति का भान। किन्तु आचरण से मिले, सदा जगत में मान।। * हवा  विषैली  हो …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई तिलक राज जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। 9, 10…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई दयाराम जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। कुछ मिसरे और समय चाहते है। इस प्रयास के…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। आ. भाई तिलक राज जी के सुझाव से यह और…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई अजय जी, प्रदत्त मिसरे पर गजल का प्रयास अच्छा हुआ है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" आदरणीय तिलक राज कपूर साहब,  आप मेरी प्रस्तुति तक आये, आपका आभारी हूँ।  // दीदावर का…"
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई लक्ष्मण सिंह धानी ' मुसाफिर' साहब हौसला अफज़ाई के लिए  आपका बहुत-बहुत…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आपने खत लिखा उसका ही असर है साईंछोड़ दी अब बुरी संगत की डगर है साईं धर्म के नाम बताया गया भाई…"
Thursday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"ग़ज़ल पर अपनी बारीक़-नज़र से टिप्पणी करने के लिए आपका आभार आदरणीय तिलकराज जी।  एक प्रश्न है: इस…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service