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आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा' कुल्लुवी'



गतांक से आगे
आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कितना बदल गया

मेरा शहर कितना बदल गया
मेरे वास्ते अब क्या रहा
मेरा शहर कितना बदल -----
न वोह मंजिलें न वोह रास्ते
जो कभी थे मेरे वास्ते
यहाँ लुट गया मेरा आशियाँ
यहाँ हमसफ़र न कोई रहा
मेरा शहर कितना बदल -----
जो गुजर गया उसे भूल जा
मेरा दिल यह कहता है मान जा
यह वक़्त की सौगात है
मेरा वक़्त अच्छा ना रहा
मेरा शहर कितना बदल -----
अब तो अजनवी सा लगे शहर
रिश्तों में घुल चुका ज़हर
कहने को सब अपनें हैं
अपनापन अब कहाँ रहा
मेरा शहर कितना बदल -----
किस किस को समझाओगे तुम
'दीपक' बड़ा मासूम है
टुकड़े भी दिल के वंट गए
मेरा दिल भी मेरा कहाँ रहा
मेरा शहर कितना बदल -----

दीपक शर्मा कुल्लुवी
०९१३६२११४८६
कई बार जब हम दिल्ली से कुल्लू जाते हैं तो ऐसा लगता है की सब बदल गया है कई बार दिल उदास भी हो जाता है क्योंकि न तो अब वोह माहोल ही रहा न वोह पुरानें दोस्त न किसी के पास अब समय ही रहा अपनीं ढफली अपना राग सब समय समय की बात है वक़्त के साथ सब बदल जाएगा लेकिन यादें कभी पुरानी नहीं होती हमेशा ताज़ा सी लगाती हैं

मैं दूर पहाड़ों से आया
जहाँ सर्द हवाएं बहती हैं
है व्यास पार्वती का संगम
जहाँ यादें मेरी बसती हैं
मेरे अपनें सभी वहीँ हैं
लेकिन मैं हूँ सबसे दूर
यह था किस्मत का लिखा
नहीं किसी का कसूर
ना जानें कब जा पाऊंगा
बापिस उन खूबसूरत फिजाओं में
कोई याद तो करता होगा
मुझको मेरे गाँव में
'दीपक शर्मा' था उस वक़्त मैं
अब हूं 'दीपक कुल्लुवी'
शक्ल-ओ-सूरत बदली,तखल्लुस बदला
लेकिन सीरत ना बदली
लेकिन सीरत ना ----
दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
०९१३६२११४८६
मैं जैसा पहले था आज भी वैसा ही हूँ बदलना चाहता भी नहीं ,अपनी शराफत अपना भोलापन नहीं छोड़ सकता
क्रमशा :
(Photo my son Deepankar & my wife Kumud at Doraha Ludhiana in 1992)

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Comment

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Comment by Rash Bihari Ravi on December 10, 2010 at 9:31pm

khubsurat bahut badhia

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