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मेरे पिता : सरिता भाटिया

मेरे पिता एवं भाई 


माँ ने जो बेशुमार प्यार दिया,

पिता ने चुपचाप दुलार किया !

ऊँगली पकड़ जो चलना सिखाया,

तुतलाते बोलों ने अर्थ आपसे पाया !

पिता की डांट में छुपा था प्यार ,

जिसका न हो पाया कभी इजहार !

अन्दर से नरम और ऊपर से कठोर ,

अकेले बैठ हमेशा ही हुए भावविभोर !

बेटे बेटी का न कभी किया अंतर ,

चलते ही रहे बिना थके आप निरंतर !

माँ के माथे की बिंदिया का थे विश्वास ,

साथ हमेशा होने का दिलाया अहसास !  

जब था अनजान सब दुनिया का नजारा ,

पिता के कन्धों पर बैठ देखा जग सारा !

जिंदगी के सफ़र का जब आपने विश्राम पाया ,

हमने कन्धों पर आपको मोक्षद्वार पहुँचाया  !  

पिता की छांव ने सिखाया खिलखिलाना ,

'सरिता' निरंतर बहना न व्यर्थ आँसू बहाना !!

.........................................

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 772

Comment

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Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:09pm

Shyam Narain Verma  आदरणीय ह्रदय से आभारी हूँ 

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:09pm

Shyam Narain Verma  आदरणीय ह्रदय से आभारी हूँ 

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:07pm

Pragya Srivastava जी शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:06pm

Sumit Naithani आदरणीय ह्रदय से आभार स्वीकारें 

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:04pm

Kewal Prasad जी बहुत बहुत शुक्रिया |

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:03pm

 Abid ali mansoori आदरणीय तह दिल से शक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on June 15, 2013 at 3:02pm

Jitendra Pastariya sir  aapka hardik abhaar 

Comment by अरुन 'अनन्त' on June 15, 2013 at 1:26pm

आदरणीया सरिता जी पिता श्री को विनम्र श्रधांजलि एवं नमन, बहुत ही सुन्दर रचना रची हैं आपने हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Shyam Narain Verma on June 15, 2013 at 12:52pm

उम्दा रचना के लिए शुभकामनाऐं......................

Comment by Pragya Srivastava on June 15, 2013 at 11:37am

सरिता जी ....................बधाई

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