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पत्नी बोली अजी सुनते हो
मुनुवा बहुत मिट्टी ख़ाता है
मैने कहा- ये असली राष्ट्र- निर्माता है
क्यूँ घबराती हो डियर
आगे चलकर बनेगा एंजीनियर
आज मिट्टी खा रहा है
कल गिट्टी खाएगा
परसों न जाने कितने पुल सड़क, बाँध और बड़ी- बड़ी परियोजनाओं
को चट कर जाएगा
राष्ट्र की मुख्य धारा मे शामिल हो जाएगा
सच्‍चे अर्थों मे यही विकास पुरुष कहलाएगा
तुम्हारा सुंदरी करण कराएगा
और मेरी नय्या पार लगाएगा
सच कहता हूँ मैं लड़का बहुत काम आएगा


आदित्य चतुरवेदी
मौलिक/ अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 19, 2013 at 10:54am

आ0 आदित्य जी, वाह! बहुत खूब! झकझोरता हुआ सटीक व्यंग। हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on May 18, 2013 at 6:46am

ऐसे ही पुत्र देश के भविष्य हैं! सुंदर हास्य व्यंग्य 

Comment by वीनस केसरी on May 17, 2013 at 4:33pm

राष्ट्र की मुख्य धारा मे शामिल हो जाएगा
सच्‍चे अर्थों मे यही विकास पुरुष कहलाएगा

विस्फोटक व्यंग्य है 

Comment by विजय मिश्र on May 17, 2013 at 4:24pm
माँ -बाप को नहीं ,सरकार को ऐसे सुपुत्रों की नितान्त आवश्यकता है ,उनके सुपुर्द करने से सबका बेड़ा पार करेगा और देश का बन्टाधार करेगा .हास्य के साथ सुंदर कटाक्ष करती सुंदर रचना मगर हम इंजीनियरों के लिए तो उपहास ही है . जय श्रीकृष्ण .
Comment by ram shiromani pathak on May 17, 2013 at 3:39pm

sundar ati sundar adarneey chaturvedi ji

Comment by श्रीराम on May 17, 2013 at 12:24pm

सच कहता हूँ मैं लड़का बहुत काम आएगा ....बड़ा हो के कोयला खायेगा ......बाप को जेल भिजवाएगा 

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