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कबहुँ सुखी क्या आलसी, ज्ञानी कब निद्रालु ?
वैरागी लोभी नहीं, हिंसक नहीं दयालु!! १


शक्ति क्षीण करते सदा, यदि अवगुण हों पास
दुर्गुण रहित चरित्र में, होता शक्ति निवास!!२

गुरुता का व्यवहार ही, गुरु को करे महान
पूजनीय औ श्रेष्ठ जो, पायें खुद सम्मान!!३

नैतिकता सद्चरित का, जिसमें पूर्ण अभाव
दयाहीन उस मनुज के, रहें मलिन ही भाव!!४

अवगुण निज में देखिये, रख सद्गुण पहचान
त्रुटियों से जो सीख ले, जग में वही महान!!५

राम शिरोमणि पाठक "दीपक"

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Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 9:32pm

आदरणीया कुन्ती  जी  हार्दिक आभार ..

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 9:31pm

आदरणीय  राजेश झा  जी  हार्दिक आभार!!!!!!!!!!

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 9:30pm

आदरणीय  बड़े  भाई केवल जी  हार्दिक आभार .

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 9:30pm

आदरणीय  बड़े  भाई  अरुण जी हार्दिक आभार ....आपको तो पता ही  है सुधार की प्रक्रिया अनवरत चलती रहती है ....रही बात गलतियों की तो आप और गुरुजन तो है ही!   सादर 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 5, 2013 at 9:04pm

आदरणीय, राम शिरोमणि पाठक जी, ज्ञानवर्धक सुन्दर दोहे। 'अवगुण निज में देखिये, रख सद्गुण पहचान
त्रुटियों से जो सीख ले, जग में वही महान!!५' बहुत-बहुत बधाई स्वीकार करें।

Comment by coontee mukerji on April 5, 2013 at 7:07pm

राम जी नमस्कार ,बहुत सुंदर दोहे .खास कर अंतिम दोहे तो सब का निचोड़ है.धन्यवाद .

Comment by राजेश 'मृदु' on April 5, 2013 at 6:21pm

बढि़या, निद्रालु को यहां आलसी के अर्थ में लेना चाहिए और शायद यही लेखक का भी विचार है

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 5, 2013 at 5:40pm

दोहे के अच्छे भाव है, बधाई स्वीकारे श्री रामशिरोमणि जी, एक दोहे निम्न तरह कैसा रहेगा विद्वजन की राय ले ले -

गुरुता के व्यवहार से,  बन सके गुरु महान .

पूज्यनीय अरु श्रेष्ठ है,  पाए स्वतः सम्मान 

Comment by अरुन 'अनन्त' on April 5, 2013 at 4:14pm

भाई राम शिरोमणि पाठक जी आपने उत्तम दोहे रचे हैं, आपके दोहे पढ़कर मैं दंग हो गया, इस मंच का सही सदुपयोग कर रहे हैं आप जमे रहिये कठिनाई का मार्ग समाप्ति की ओर है.

ज्ञानी कब निद्रालु ? भाई इस बारे में मेरे विचार भिन्न है निद्रा तो सभी को आती है और सभी को प्रिय भी है किसी को ज्यादा किसी को कम. इस पर अधिक गुरुजन ही कहेंगे. बहरहाल मेरी ओर से हार्दिक बधाई स्वीकारें प्रयासरत रहें सफलता अवश्य मिलेगी. सादर

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