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कबहुँ सुखी क्या आलसी, ज्ञानी कब निद्रालु ?
वैरागी लोभी नहीं, हिंसक नहीं दयालु!! १


शक्ति क्षीण करते सदा, यदि अवगुण हों पास
दुर्गुण रहित चरित्र में, होता शक्ति निवास!!२

गुरुता का व्यवहार ही, गुरु को करे महान
पूजनीय औ श्रेष्ठ जो, पायें खुद सम्मान!!३

नैतिकता सद्चरित का, जिसमें पूर्ण अभाव
दयाहीन उस मनुज के, रहें मलिन ही भाव!!४

अवगुण निज में देखिये, रख सद्गुण पहचान
त्रुटियों से जो सीख ले, जग में वही महान!!५

राम शिरोमणि पाठक "दीपक"

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Comment by Saurabh Pandey on April 16, 2013 at 10:39pm

उत्तम दोहे हुए हैं, भाई रामशिरोमणिजी. सतत प्रयासरत रहें.

शक्ति क्षीण करते सदा, यदि अवगुण हों पास .. .  अवगुण के पास होने का कथ्य समझ में नहीं आया. कि, अवगुण या गुण का कोई भौतिक स्वरूप नहीं होता कि पास होंगे. बल्कि ये अंतर्निहित हुआ करते हैं.

शुभेच्छाएँ.

Comment by ram shiromani pathak on April 6, 2013 at 10:58am

hardik dhanyawad adarneey jawahar lal ji

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 6, 2013 at 7:18am

दोहे के भाव सुन्दर और सीख देने वाले हैं!

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 10:30pm

बृजेश कुमार सिंह ji hardik aabhar.............

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 10:25pm

आदरणीया सीमा जी  हार्दिक आभार  ...सादर 

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 10:24pm

आदरणीय अशोक सर हार्दिक आभार .......आपका अमूल्य सुझाव मिला बड़ी प्रसन्नता हुई ..ऐसे ही कृपा बनाए रखियेगा ...सादर 

Comment by बृजेश नीरज on April 5, 2013 at 10:21pm

ऐसे रास्ता दिखाने वाले दोहे अब कम ही पढ़ने को मिलते हैं। बहुत सुन्दर लिखा आपने। मेरी बधाई स्वीकारें।

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 5, 2013 at 10:17pm

कबहुँ सुखी क्या आलसी, ज्ञानी कब निद्रालु ?
वैरागी लोभी नहीं, हिंसक नहीं दयालु!! १ ...................दोहे के प्रथम पद में गेयता का नितांत अभाव है. मुझे लगता है बेहतर होगा इस पर पुनः विचार करें. क्रम चार और पांच के दोहे अच्छे रचे हैं बधाई स्वीकारें भाई राम शिरोमणि जी.

Comment by seema agrawal on April 5, 2013 at 10:17pm

बहुत भाव पूर्ण दोहे ....सभी दोहों का कथ्य उच्च कोटि का ....दोहों के मूल स्वभाव से न्याय करते हुए सभी दोहों में इस दोहे ने मन को प्रसन्न कर दिया 

नैतिकता सद्चरित का, जिसमें पूर्ण अभाव 
दयाहीन उस मनुज के, रहें मलिन ही भाव!!...हार्दिक बधाई राम शिरोमणि जी .......

Comment by ram shiromani pathak on April 5, 2013 at 9:32pm

आदरणीय लक्षमण सर   हार्दिक आभार !!!!!!!!!

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