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माँ तुम ममता का मूर्त रूप
तुम सतरंगी स्नेह -आँचल
तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र
तुम पावन -पुनीत गंगाजल
टेढ़ा -मेढ़ा विकट जीवन जगत
तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल
छल ,छदम ,कपट चारों तरफ़
माँ तेरी गोदी निर्मल ,निश्छल
पावक ,अनल सामान जीवन
तुम चन्दन की छाया शीतल
तेरे आशीषों की ज्योत्सना से
पथ मेरा नित -नित उज्जवल
पाने तेरा वात्सल्य सोम -सुधा
ज़न्म-ज़न्म पी लूँ जीवन गरल
तेरी कोख पाने की अभिलाषा में
स्वयं -भू भी है आतुर प्रतिपल
मेरी पुस्तक "एक कोशिश रोशनी की ओर "से

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Comment by asha pandey ojha on May 8, 2010 at 9:57pm
Preetam ji,Ganesg bhaiya &Admin ji..ma..ko ek din kya tmam jindgee arpan ..par aaj ise post karne ka mtlab tha ki maa ke charno ka ek baar punh smran..aap sabhee ko mmtr divas kee bahut bahut shubh kamnayen..!
Comment by Admin on May 8, 2010 at 8:47pm
"माँ" एक छोटा सा शब्द, लेकिन इस छोटे से शब्द मे ममता का ऐसा समुन्द्र समाया है जिसको थाह पाना हम सबके बस मे नही है, हालाकि प्रत्येक दिन ही माँ को समर्पित है फिर भी एक खाश दिन को माँ को विशेष रुप से समर्पित करना अच्छा है, तथा इस खाश दिन पर आपकी खाश कविता बहुत ही प्यारा है, बहुत बहुत धन्यबाद है आपको यह कविता पोस्ट करने पर ।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 8, 2010 at 5:38pm
तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र
तुम पावन -पुनीत गंगाजल
टेढ़ा -मेढ़ा विकट जीवन जगत
तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल

आशा दिदी, मदर डे के अवसर पर माँ को समर्पित यह कविता अत्यन्त ही प्रसंसनीय है, बहुत ही खुबसुरत रचना है,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 8, 2010 at 5:35pm
bahut badhiya likha hai aapne didi......
माँ तुम ममता का मूर्त रूप
तुम सतरंगी स्नेह -आँचल
तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र
तुम पावन -पुनीत गंगाजल
Comment by asha pandey ojha on May 8, 2010 at 4:21pm
Aapka bahut bahut aabhar Ravi Kumar ji ..!
Comment by Rash Bihari Ravi on May 8, 2010 at 4:07pm
माँ तुम ममता का मूर्त रूप
तुम सतरंगी स्नेह -आँचल
तुम मंदिर प्रांगन सी पवित्र
तुम पावन -पुनीत गंगाजल
टेढ़ा -मेढ़ा विकट जीवन जगत
तुम सीधी-सादी सरल प्रांजल
छल ,छदम ,कपट चारों तरफ़
माँ तेरी गोदी निर्मल ,निश्छल
man ko mugdh karte sabd bahut badhia

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