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जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया-

 

मौलिक / अप्रकाशित

करकश करकच करकरा, कर करतब करग्राह ।
तरकश से पुरकश चले, डूब गया मल्लाह ।
डूब गया मल्लाह, मरे सल्तनत मुगलिया ।
जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया ।
धर्म जातिगत भेद, याद आ जाते बरबस ।
जीता औरंगजेब, जनेऊ काटे करकश ।

करकश=कड़ा करकच=समुद्री नमक
करकरा=गड़ने वाला
कर = टैक्स
करग्राह = कर वसूलने वाला राजा

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Comment by रविकर on March 1, 2013 at 4:18pm

अब अगर जोड़ घटाव कर देखा जाये तो ब्लॉग पर प्रकाशन का समय १ मार्च का लगभग प्रात: ११ बजे का आता है-
आभार आदरणीय-
अब अगर जोड़ घटाव कर देखा जाये तो ब्लॉग पर प्रकाशन का समय १ मार्च का लगभग प्रात: ११ बजे का आता है-
आभार आदरणीय-
जबकि यहाँ यह १०.४५ पर ही प्रकाशित हो चुकी थी-
आगे से और लंबा अंतर रखने की कोशिश करूंगा |
सादर

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 4:14pm

01 march 2.41 dikha raha hai-

shaayad shanka ka samaadhaan ho jaaye aapkaa-

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 4:12pm

आपका यह सचित्र कमेन्ट अभी प्रकाशित किया है अपनी पोस्ट पर -
जरा समय चेक कर लें-

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 4:11pm

२१.४९ यह शायद वैश्विक समय दर्शा रहा है-
आदरणीय -
पुन: मेरे ब्लॉग पर आयें और निश्चिन्त हो लें-
यह सेटिंग ठीक करने में असमर्थ हूँ-

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 4:09pm

यह समय की सेटिंग का मामला है-
अभी तुरंत एक पोस्ट की है यहीं पर उसका टाइम भी देखें-

Friday, 1 March 2013

Comment by Sanjay Kumar Singh on March 1, 2013 at 4:05pm

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 3:53pm

महोदय, आभार-
दिनभर में जो रचनाएँ करता हूँ-
उनमे से कुछ श्रेष्ठ रचनाएँ
OBO पर प्रकाशित करता हूँ-
उसके बाद अपने ब्लॉग पर-
प्रकाशन समय देखने का कष्ट करें-
वैसे आपकी जानकारी के लिए मेरे अकेले के पांच ब्लॉग हैं-
उनके लिए ही रचनाएं पूरी करने की कोशिश करता हूँ-
एक बुरी आदत है मेरे में-
रचना रचने में ५ मिनट लगता हूँ और दुबारा बहुत कम देखता हूँ-
जल्दबाजी का शिकार हूँ-
फिर भी यह रचना सौ प्रतिशत मौलिक और अप्रकाशित थी-

Comment by Sanjay Kumar Singh on March 1, 2013 at 3:45pm

रचना अच्छी है, रचनाकार को शुभकामना !

एडमिन जी @ क्या आप संतुष्ट है कि यह रचना पूर्व प्रकाशित नहीं है ? यह रचना ओपन बुक से पहले ब्लागस्पाट पर प्रकाशित है ।  जबकि रचनाकार महोदय ने "मौलिक / अप्रकाशित" सबसे ऊपर लिख रखा है ।

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 3:25pm

आभार आदरणीय ||

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 3:25pm

आभार आदरेया |

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