For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बेबसी हंसने लगी ...

बातों से भी ये गम क्यूँ कम नही होते,

आंसुओ से दिल के कोने नम नही होते.

थी बहुत उम्मीद तो अपनों से इस दिल को कभी,

पर हमेशा साथ ये हमदम नही होते...

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...                      

                 

प्यार है बस जहां रंजीश नही कोई कभी,

क्या कभी ऐसे दिलों में गम नही होते.

याद तो करते है हम उनको सदा ही रात दिन,

ख्वाब में उनके कभी क्या हम नही होते...

 

अब तो  भूख भी लगना भूल गई ,

और प्यास ने लगना छोड़ दिया.

हर दिन बना जीवन उपवास उनका,

क्या कभी ऐसों पर खुदा मेहरबान नही होते...

Views: 1005

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 10:37pm

धन्यवाद मनोज जी ..इतनी तारीफ़ सुनकर में  निशब्द हो गई हु...तहेदिल से धन्यवाद ...

Comment by Manoj Nautiyal on February 18, 2013 at 10:28pm

वाह , आरती जी ....सच कहूँ तो आपकी लेखनी के भावों के इर्द गिर्द एक बहुत बड़ी कवियत्री घूम रही है ...... बस आप ऐसे ही लिखिए एक दिन  मै उस कवियत्री से भी मिलूंगा \ सच में सुन्दर भाव |

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 8:33pm

संदीप जी आपका तहेदिल से धन्यवाद 

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 7:59pm

आपका हार्दिक धन्यवाद प्रिय वेदिका जी...

Comment by वेदिका on February 18, 2013 at 7:14pm

बातों से भी ये गम क्यूँ कम नही होते,
आंसुओ से दिल के कोने नम नही होते.
थी बहुत उम्मीद तो अपनों से इस दिल को कभी,
पर हमेशा साथ ये हमदम नही होते...

बहुत उम्मीदें होती है ... टूट जाती है ... कितना  भी बताओ .....सच है पीड़ा कम नही होती ...

पीड़ा चित्रण बहुत नैकट्य से उकेरा आपने आरती जी ।

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 7:04pm

पाठक जी  आपको मेरी रचना के भाव अच्छे लगे ..आपका तहेदिल से शुक्रिया ..

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 7:03pm

प्रणाम लक्ष्मण सर.. आपको मेरी रचना पसंद आई..इससे ज्यादा ख़ुशी की बात और क्या हो सकती है..आपका तहेदिल से धन्यवाद 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 18, 2013 at 5:38pm

बेबसी पर भुत सुन्दर भाव अभ्व्यक्त किये है आपने बहन आरती शर्मा जी 

दरअसल जहां सुख है, वहां दुःख भी है, और आदमी बेबस है, उसके बस में है
तो केवल कर्म । जहां वर्षा का सुख लेना है, तो बादलों की गरज, ओलो के मार 
और कड़कती बिजली का खौफ सहना हमारी बेबसी है । हार्दिक बधाई 
Comment by ram shiromani pathak on February 18, 2013 at 5:36pm

आदरणीया आरती जी:!!!!!!

बहुत सुन्दर भावों और विचारों में पगी कविता के लिए हार्दिक साधुवाद आपको - 

बेबसी हंसने लगी ख़ामोशी अब है गूंजती,

बंद कमरों में कभी कोई मौसम नही होते.

जहाँ ख़ुशी वहां खिलती मन की हर कली,

उन घरानों में क्या कभी मातम नही होते...   

सुन्दर पंक्तियाँ !!

Comment by Aarti Sharma on February 18, 2013 at 3:39pm

आपका तहेदिल से धन्यवाद अभिनव सर ..होस्लाफ्जाही के लिए शुक्रिया..आभार 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
23 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
yesterday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service