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आपकी नज़रें इनायत हो गई,
दूर बरसों की, शिकायत हो गई ।

आप हैं तो धडकनों में गीत है,
जिंदगी जैसे, रवायत हो गई ।

बात उनकी मानना बस!फ़र्ज़ है,
जो, जहाँ, जैसी, हिदायत हो गई ।

आपकी खामोशियों को देखकर,
बात अपनी बस! हिकायत हो गई |

फूल सी लम्बी थी उनकी जिंदगी,
साँस लेने में, किफायत हो गई |

मेरी नज़रों का ,करें वो शुक्रिया,
खूबसूरत वो, निहायत हो गई ।

बात टेढ़ी कब,  तलक रहती भला,
सादगी बोली, हिमायत हो गई |

  • अविनाश बागडे

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Comment by AVINASH S BAGDE on February 2, 2013 at 2:44pm

Manoj Nautiyal ji

Aarti Sharma mam

aabhar...

Comment by Manoj Nautiyal on February 2, 2013 at 8:22am

बहुत सुन्दर गजल .......... फूल सी लम्बी थी उनकी जिंदगी,
साँस लेने में, किफायत हो गई |....मन छूती पंक्तियाँ 

Comment by Aarti Sharma on February 1, 2013 at 11:41pm

फूल सी लम्बी थी उनकी जिंदगी,
साँस लेने में, किफायत हो गई |

बहुत खूब बधाई स्वीकारें..

कृपया ध्यान दे...

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