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मान है,सम्मान है.

पर ईमान नही.

धन है दौलत है,

पर नियत नही.

चाह आसमान में उड़ने की,

पर मेहनत नही.

मंजिले है राहे है,

पर मुसाफ़िर नही.

मंदिर है भगवान है,

पर भक्त नही.

माँ है बाप है ,

पर सेवा नही.

भाई है बहन है,

पर प्यार नही.

नेता है भ्रष्टाचार है,

पर विकास नही.

संत है सत्संग है,

पर सत्संगति नही.

जन्म है मृत्यु है,

पर भय नही.

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 31, 2013 at 3:57pm

सीधी सहज सुन्दर अभिव्यक्ति

हार्दिक बधाई आरती शर्मा जी 

Comment by Dr.Ajay Khare on January 31, 2013 at 3:40pm

sharma madam badia rachna he badhai


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 31, 2013 at 2:47pm

एक सामयिक रचना, भावों का सुन्दर प्रेषण, प्रयास बढ़िया है , सतत रहें, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर |

Comment by ram shiromani pathak on January 31, 2013 at 1:41pm

मंजिले है राहे है,

पर मुसाफ़िर नही.

मंदिर है भगवान है,

पर भक्त नही.

माँ है बाप है ,

पर सेवा नही.!!!!!!!

उत्तम रचना हार्दिक बधाई !!!!!!!!!!!!!!

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